facebook


उच्च रक्तचाप (High blood pressure) - लक्षण, कारण, जांच और इलाज

Hypertension Blood Pressure Hypertension Blood Pressure

हाई ब्लड प्रेशर क्या होता है?

हाइपरटेंशन तब होता है जब आपका ब्लड प्रेशर असामान्य रूप से बढ़े हुए स्तर पर पहुंच जाता है। ब्लड प्रेशर की जांच में यह देखा जाता है कि आपकी धमनियों से कितनी मात्रा में खून गुजर रहा है और जब दिल खून पंप करता है तो खून को धमनियों में कितनी रुकावट (Resistance) का सामना करना पड़ रहा है। जब धमनियां (Arteries) संकरी हो जाती हैं तो रुकावट बढ़ जाती है। आपकी धमनियां जितनी ज्यादा संकरी होंगी, आपका ब्लड प्रेशर उतना ही ज्यादा होगा। लंबे समय तक ब्लड प्रेशर बढ़ा रहने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें दिल की बीमारियां भी शामिल हैं।

हाइपरटेंशन बहुत आम समस्या है। गाइडलाइन बदलने के बाद अब माना जाता है कि एडल्ट (Adult) की बड़ी संख्या को हाई ब्लड प्रेशर की श्रेणी में रखा जा सकता है। हाइपरटेंशन आमतौर पर कई सालों में धीरे-धीरे विकसित होता है। ज्यादातर लोगों को कोई खास लक्षण महसूस नहीं होते। लेकिन बिना लक्षण के भी हाई ब्लड प्रेशर आपकी धमनियों और अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है, खासकर दिमाग, दिल, आंखों और किडनी को।

शुरुआती पहचान बहुत जरूरी है। नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराने से आप और आपके डॉक्टर को समय रहते बदलाव का पता चल सकता है। अगर आपका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है, तो डॉक्टर कुछ हफ्तों तक बार-बार ब्लड प्रेशर जांचने की सलाह दे सकते हैं ताकि यह देखा जा सके कि रीडिंग लगातार ऊंची रहती है या फिर सामान्य हो जाती है। हाइपरटेंशन के इलाज में प्रिस्क्रिप्शन दवाएं और हेल्दी लाइफस्टाइल दोनों शामिल होते हैं। अगर इसका इलाज न किया जाए तो यह दिल का दौरा (Heart Attack) और स्ट्रोक (Stroke) जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।

हाइपरटेंशन के लक्षण क्या हैं?

हाइपरटेंशन (Hypertension) को अक्सर साइलेंट कंडीशन कहा जाता है। बहुत से लोगों को कोई भी लक्षण महसूस नहीं होते। कई बार इस स्थिति को गंभीर स्तर तक पहुंचने में सालों लग जाते हैं, तब जाकर लक्षण दिखाई दे सकते हैं। तब भी ये लक्षण कई बार दूसरी समस्याओं से जुड़े हुए लग सकते हैं।

गंभीर हाइपरटेंशन के लक्षण इनमें शामिल हो सकते हैं:-

  • सिरदर्द
  • सांस फूलना
  • नाक से खून आना
  • चेहरे या शरीर पर लालिमा
  • चक्कर आना
  • सीने में दर्द
  • दृष्टि (Vision) में बदलाव
  • पेशाब में खून आना

ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। ये हर हाई ब्लड प्रेशर वाले व्यक्ति में नहीं दिखते, इसलिए केवल लक्षण आने का इंतजार करना खतरनाक हो सकता है। हाई ब्लड प्रेशर का पता लगाने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराएं। ज्यादातर डॉक्टर क्लिनिक में हर विजिट पर ब्लड प्रेशर मापते हैं। अगर आप साल में सिर्फ एक बार हेल्थ चेकअप कराते हैं, तो अपने डॉक्टर से हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम और जरूरी जांचों के बारे में जरूर पूछें ताकि आप अपना ब्लड प्रेशर समय-समय पर मॉनिटर कर सकें।

उदाहरण के लिए, अगर आपके परिवार में दिल की बीमारी (Heart Disease) का इतिहास है या आपके अंदर हाइपरटेंशन के जोखिम फैक्टर मौजूद हैं, तो डॉक्टर साल में दो बार ब्लड प्रेशर जांचने की सलाह दे सकते हैं। इससे किसी भी समस्या को गंभीर होने से पहले ही पकड़ा जा सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर के कारण क्या हैं?

हाइपरटेंशन के दो मुख्य प्रकार होते हैं। हर प्रकार के कारण अलग-अलग होते हैं।

  • प्राइमरी हाइपरटेंशन (Primary Hypertension): प्राइमरी हाइपरटेंशन को एसेंशियल हाइपरटेंशन (Essential Hypertension) भी कहा जाता है। यह प्रकार धीरे-धीरे समय के साथ विकसित होता है और इसका कोई स्पष्ट एकल कारण नहीं मिलता। ज्यादातर लोगों में हाई ब्लड प्रेशर इसी प्रकार का होता है। रिसर्च अभी तक पूरी तरह साफ नहीं कर पाई है कि ब्लड प्रेशर धीरे-धीरे क्यों बढ़ता है। कई फैक्टर मिलकर इसमें भूमिका निभा सकते हैं, जैसे:
  • जीन (Genes): कुछ लोग आनुवंशिक रूप से हाई ब्लड प्रेशर के लिए अधिक संवेदनशील होते हैं। यह माता-पिता से मिले जीन में बदलाव या असामान्यताओं की वजह से हो सकता है।
  • शारीरिक बदलाव: शरीर में किसी भी तरह के बदलाव से कई तरह की समस्याएं शुरू हो सकती हैं। हाई ब्लड प्रेशर भी उनमें से एक हो सकता है। उदाहरण के लिए, उम्र बढ़ने के साथ किडनी (Kidney) के कामकाज में बदलाव से शरीर में नमक और तरल (Fluid) का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।
  • पर्यावरण और जीवनशैली: लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि की कमी और गलत खानपान जैसी आदतें शरीर पर बुरा असर डालती हैं। ऐसी लाइफस्टाइल से वजन बढ़ सकता है। ओवरवेट या मोटापा हाई ब्लड प्रेशर का बड़ा जोखिम फैक्टर है।

सेकेंडरी हाइपरटेंशन

सेकेंडरी हाइपरटेंशन अक्सर अचानक शुरू होता है और प्राइमरी हाइपरटेंशन से ज्यादा गंभीर हो सकता है। कई मेडिकल स्थितियां हाई ब्लड प्रेशर का कारण बन सकती हैं, जैसे:

  • किडनी की बीमारी
  • ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (Obstructive Sleep Apnea)
  • जन्म से मौजूद दिल की संरचनात्मक खराबी (Congenital Heart Defects)
  • थायरॉइड (Thyroid) की समस्याएं
  • कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट
  • नशीली ड्रग्स का इस्तेमाल
  • अत्यधिक या लंबे समय तक शराब का सेवन
  • एड्रिनल ग्लैंड (Adrenal Gland) की समस्याएं
  • कुछ एंडोक्राइन (Endocrine) ट्यूमर

हाइपरटेंशन (Hypertension) की जांच

हाइपरटेंशन की पहचान के लिए सबसे जरूरी जांच ब्लड प्रेशर मापना है। ज्यादातर डॉक्टर क्लिनिक में रूटीन विजिट के दौरान ब्लड प्रेशर चेक करते हैं। अगर आपकी अगली विजिट पर ब्लड प्रेशर नहीं मापा जाए तो आप खुद डॉक्टर से इसे मापने के लिए कह सकते हैं।

अगर आपकी ब्लड प्रेशर रीडिंग ऊंची आती है, तो डॉक्टर कुछ दिनों या हफ्तों तक बार-बार रीडिंग लेने की सलाह दे सकते हैं। सिर्फ एक बार की रीडिंग के आधार पर आमतौर पर हाइपरटेंशन का निदान नहीं किया जाता। डॉक्टर को लगातार ऊंची रीडिंग का सबूत चाहिए होता है।

इसका कारण यह है कि माहौल और तनाव, जैसे डॉक्टर के क्लिनिक में घबराहट, भी अस्थायी रूप से ब्लड प्रेशर बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा दिन भर में भी ब्लड प्रेशर बदलता रहता है।

अगर आपका ब्लड प्रेशर लगातार ऊंचा रहता है, तो डॉक्टर कुछ और जांचें करवा सकते हैं ताकि किसी छिपी हुई बीमारी का पता लगाया जा सके। इनमें शामिल हो सकती हैं:

  • यूरिन टेस्ट
  • कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) और अन्य ब्लड टेस्ट
  • दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी की जांच के लिए इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (Electrocardiogram - EKG/ECG)
  • दिल या किडनी का अल्ट्रासाउंड (Ultrasound)

इन जांचों से डॉक्टर यह समझ पाते हैं कि कहीं कोई दूसरी बीमारी तो हाई ब्लड प्रेशर का कारण नहीं बन रही है। साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर रहने से आपके अंगों पर क्या असर पड़ा है।

इस दौरान डॉक्टर आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर का इलाज शुरू कर देते हैं। समय पर इलाज शुरू करने से स्थायी नुकसान का खतरा कम हो सकता है।

ब्लड प्रेशर रीडिंग को कैसे समझें

ब्लड प्रेशर की रीडिंग दो संख्याओं से मिलकर बनती है:

  • सिस्टोलिक प्रेशर (Systolic Pressure): यह ऊपर की संख्या होती है। यह बताती है कि जब दिल धड़कता है और खून पंप करता है, तब धमनियों में कितना दबाव बन रहा है।
  • डायस्टोलिक प्रेशर (Diastolic Pressure): यह नीचे की संख्या होती है। यह बताती है कि दिल की धड़कनों के बीच आराम की स्थिति में धमनियों में कितना दबाव है।

एडल्ट में ब्लड प्रेशर की रीडिंग को पांच श्रेणियों में बांटा जाता है:

  • नॉर्मल (Healthy): 120/80 mm Hg से कम ब्लड प्रेशर को सामान्य माना जाता है।
  • एलीवेटेड (Elevated): सिस्टोलिक 120 से 129 mm Hg के बीच और डायस्टोलिक 80 mm Hg से कम हो। इस स्थिति में आमतौर पर दवा नहीं दी जाती, बल्कि डॉक्टर लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह देते हैं ताकि ब्लड प्रेशर फिर से सामान्य हो सके।
  • स्टेज 1 हाइपरटेंशन: सिस्टोलिक 130 से 139 mm Hg के बीच या डायस्टोलिक 80 से 89 mm Hg के बीच हो।
  • स्टेज 2 हाइपरटेंशन: सिस्टोलिक 140 mm Hg या उससे अधिक, या डायस्टोलिक 90 mm Hg या उससे अधिक हो।
  • हाइपरटेंसिव क्राइसिस (Hypertensive Crisis): सिस्टोलिक 180 mm Hg से ज्यादा या डायस्टोलिक 120 mm Hg से ज्यादा हो। इस स्तर का ब्लड प्रेशर मेडिकल इमरजेंसी है। अगर इस समय सीने में दर्द, सिरदर्द, सांस फूलना या दृष्टि में बदलाव जैसे लक्षण हों तो तुरंत इमरजेंसी रूम में चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।


ब्लड प्रेशर मापने के लिए प्रेशर कफ (Cuff) का इस्तेमाल किया जाता है। सही रीडिंग के लिए जरूरी है कि कफ का साइज आपके हाथ के अनुसार सही हो। गलत साइज का कफ गलत रीडिंग दे सकता है।

बच्चों और किशोरों (Teenagers) के लिए ब्लड प्रेशर की सामान्य रेंज अलग होती है। अगर आपको अपने बच्चे का ब्लड प्रेशर मॉनिटर करने के लिए कहा गया है, तो उनके डॉक्टर से उम्र के अनुसार सही रेंज के बारे में जरूर पूछें।

हाइपरटेंशन के इलाज के विकल्प

आपके लिए कौन सा इलाज सबसे बेहतर रहेगा, यह कई बातों पर निर्भर करता है। इनमें शामिल हैं – आपको किस प्रकार का हाइपरटेंशन है और उसके पीछे कौन से कारण पाए गए हैं।

प्राइमरी हाइपरटेंशन के इलाज के विकल्प

अगर डॉक्टर आपको प्राइमरी हाइपरटेंशन बताते हैं, तो सबसे पहले आमतौर पर लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह दी जाती है। हेल्दी खानपान, वजन कम करना, नमक कम लेना और नियमित व्यायाम से ब्लड प्रेशर कम करने में मदद मिल सकती है। अगर सिर्फ लाइफस्टाइल बदलाव से फायदा न हो या कुछ समय बाद असर कम हो जाए, तो डॉक्टर दवाएं शुरू कर सकते हैं।

सेकेंडरी हाइपरटेंशन के इलाज के विकल्प

अगर डॉक्टर को कोई दूसरी बीमारी या कारण मिलता है जो हाई ब्लड प्रेशर पैदा कर रहा है, तो इलाज का फोकस उस मूल कारण को ठीक करने पर होगा। उदाहरण के लिए, अगर कोई दवा जो आप ले रहे हैं, ब्लड प्रेशर बढ़ा रही है, तो डॉक्टर ऐसी दूसरी दवा चुनने की कोशिश करेंगे जिसका यह साइड इफेक्ट न हो।

कभी-कभी मूल कारण का इलाज करने के बाद भी ब्लड प्रेशर ऊंचा बना रह सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर आपके साथ मिलकर लाइफस्टाइल में बदलाव की योजना बनाएंगे और प्रिस्क्रिप्शन दवाइयाँ लिखेंगे ताकि ब्लड प्रेशर कम किया जा सके।

हाइपरटेंशन का इलाज समय के साथ बदल भी सकता है। जो दवा या डोज शुरू में कारगर थी, वह आगे चलकर कम असरदार हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर समय-समय पर आपकी दवाओं और प्लान को एडजस्ट करते रहते हैं।

हाई ब्लड प्रेशर के लिए दवाएं

कई लोगों को हाई ब्लड प्रेशर की दवाओं (Antihypertensive Medicines) के साथ ट्रायल-एंड-एरर की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। आपको अलग-अलग दवाएं या दवाओं का कॉम्बिनेशन आजमाना पड़ सकता है, जब तक कि आपके लिए सबसे असरदार और सहन होने वाला विकल्प न मिल जाए। आप हाइपरटेंशन की दवाएं डॉक्टर की सलाह से ले सकते हैं।

हाइपरटेंशन के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ प्रमुख दवाएं:

  • बीटा-ब्लॉकर्स (Beta-Blockers): ये दवाएं दिल की धड़कन को धीमा और हल्का बनाती हैं। इससे हर धड़कन के साथ धमनियों में कम खून पंप होता है और ब्लड प्रेशर कम होता है। ये शरीर में कुछ ऐसे हार्मोन के असर को भी कम करते हैं जो ब्लड प्रेशर बढ़ा सकते हैं।
  • डाययूरेटिक्स (Diuretics): शरीर में ज्यादा सोडियम और अतिरिक्त तरल जमा होने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। डाययूरेटिक्स, जिन्हें वॉटर पिल्स (Water Pills) भी कहा जाता है, किडनी की मदद से शरीर से अतिरिक्त सोडियम बाहर निकालते हैं। सोडियम के साथ खून में जमा अतिरिक्त तरल भी पेशाब के जरिए बाहर निकलता है, जिससे ब्लड प्रेशर कम होता है।
  • एसीई इन्हिबिटर्स (ACE Inhibitors): एंजियोटेंसिन (Angiotensin) एक केमिकल है जो धमनियों की दीवारों को सिकोड़ता और टाइट करता है। ACE (Angiotensin-Converting Enzyme) इन्हिबिटर्स शरीर में इस केमिकल के बनने को कम करते हैं। इससे धमनियां रिलैक्स होती हैं और ब्लड प्रेशर घटता है।
  • एंजियोटेंसिन II रिसेप्टर ब्लॉकर्स (ARBs): जहां ACE इन्हिबिटर्स एंजियोटेंसिन के बनने को रोकते हैं, वहीं ARBs एंजियोटेंसिन को उसके रिसेप्टर से जुड़ने से रोकते हैं। इससे धमनियां सिकुड़ती नहीं हैं और रिलैक्स रहती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर कम होता है।
  • कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स: ये दवाएं दिल की मांसपेशियों में जाने वाले कुछ कैल्शियम को रोकती हैं। इससे दिल की धड़कन की ताकत कम हो जाती है और ब्लड प्रेशर घटता है। ये दवाएं धमनियों की मांसपेशियों पर भी असर डालती हैं, जिससे वे ढीली होती हैं और ब्लड प्रेशर और कम हो जाता है।
  • अल्फा-2 एगोनिस्ट्स (Alpha-2 Agonists): इस प्रकार की दवाएं उन नर्व सिग्नल्स को बदलती हैं जो धमनियों को सिकोड़ने का संदेश देते हैं। इससे धमनियां रिलैक्स होती हैं और ब्लड प्रेशर कम होता है।

हाइपरटेंशन के लिए घरेलू उपाय

हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर आप उन फैक्टर को कंट्रोल कर सकते हैं जो हाई ब्लड प्रेशर का कारण बनते हैं। यहां कुछ आम और उपयोगी घरेलू उपाय दिए जा रहे हैं:

हेल्दी डाइट अपनाना

दिल के लिए फायदेमंद डाइट हाई ब्लड प्रेशर कम करने में बहुत मददगार होती है। यह पहले से कंट्रोल में चल रहे ब्लड प्रेशर को स्थिर रखने और जटिलताओं के खतरे को कम करने के लिए भी जरूरी है। इन जटिलताओं में दिल की बीमारी, स्ट्रोक और हार्ट अटैक शामिल हैं।

हार्ट-हेल्दी डाइट में इन चीजों पर जोर दिया जाता है:

  • फल
  • सब्जियां
  • होल ग्रेन्स (Whole Grains)
  • लीन प्रोटीन (Lean Protein) जैसे मछली, दालें, कम फैट वाला पनीर या चिकन

शारीरिक गतिविधि बढ़ाना

हेल्दी वजन तक पहुंचने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि बहुत जरूरी है। वजन कम करने के अलावा व्यायाम तनाव कम करने, स्वाभाविक रूप से ब्लड प्रेशर घटाने और सर्कुलेटरी सिस्टम (Circulatory System) को मजबूत बनाने में मदद करता है। कोशिश करें कि हफ्ते में कम से कम 150 मिनट मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि करें, यानी लगभग 30 मिनट, हफ्ते में पांच दिन।

हेल्दी वजन हासिल करना

अगर आपका वजन ज्यादा है या आप मोटापे से ग्रस्त हैं, तो हेल्दी डाइट और नियमित व्यायाम की मदद से वजन कम करने से ब्लड प्रेशर कम करने में काफी मदद मिल सकती है।

तनाव को मैनेज करना

व्यायाम तनाव को कंट्रोल करने का एक अच्छा तरीका है। इसके अलावा ये गतिविधियां भी मदद कर सकती हैं:

  • मेडिटेशन (Meditation)
  • गहरी सांस लेने की तकनीक
  • मसाज
  • मसल रिलैक्सेशन (Muscle Relaxation)
  • योग

ये सभी तरीके तनाव कम करने में प्रभावी माने जाते हैं। पर्याप्त और अच्छी नींद लेना भी तनाव के स्तर को कम करने में मदद करता है।

स्वच्छ और संतुलित जीवनशैली अपनाना

अगर आप स्मोकिंग करते हैं, तो इसे छोड़ने की कोशिश करें। तंबाकू के धुएं में मौजूद केमिकल शरीर के ऊतकों (Tissues) को नुकसान पहुंचाते हैं और धमनियों की दीवारों को कठोर बना देते हैं।
अगर आप अक्सर या ज्यादा मात्रा में शराब पीते हैं, या शराब पर निर्भरता महसूस होती है, तो शराब कम करने या छोड़ने के लिए मदद लें। शराब ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती है।

हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों के लिए डाइट संबंधी सुझाव

हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने और जटिलताओं से बचने के सबसे असरदार तरीकों में से एक है सही डाइट। आप क्या खाते हैं, इसका आपके ब्लड प्रेशर पर सीधा असर पड़ता है।
हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों के लिए कुछ आम डाइट संबंधी सुझाव इस प्रकार हैं:

मीट कम, पौधों से मिलने वाला भोजन ज्यादा

प्लांट-बेस्ड डाइट (Plant-Based Diet) अपनाने से फाइबर की मात्रा बढ़ती है और सोडियम, सैचुरेटेड फैट (Saturated Fat) और ट्रांस फैट (Trans Fat) की मात्रा कम होती है, जो आमतौर पर मीट और फुल-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स से मिलती है। अपने खाने में फल, सब्जियां, हरी पत्तेदार सब्जियां और होल ग्रेन्स की मात्रा बढ़ाएं। मीट की जगह मछली, चिकन, दालें या टोफू (Tofu) जैसे हेल्दी लीन प्रोटीन चुनें।

डाइट में सोडियम कम करना

हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों और दिल की बीमारी के जोखिम वाले लोगों को रोजाना सोडियम की मात्रा लगभग 1500 से 2300 मिलीग्राम के बीच रखने की सलाह दी जाती है। सोडियम कम करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप ताजा खाना घर पर बनाकर खाएं। बाहर का खाना, पैकेज्ड फूड (Packaged food), रेडी-टू-ईट और प्रोसेस्ड फूड (Processed food) में आमतौर पर बहुत ज्यादा नमक होता है, इसलिए इन्हें कम से कम लें।

मीठा कम करें

बहुत ज्यादा मीठे खाद्य पदार्थ और शुगरी ड्रिंक्स (Sugary Drinks) में कैलोरी तो बहुत होती है, लेकिन पोषण बहुत कम या नहीं के बराबर होता है। अगर मीठा खाने का मन हो तो ताजे फल या कम मात्रा में डार्क चॉकलेट लें, जिसमें कम चीनी हो। कुछ स्टडीज से संकेत मिले हैं कि सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट लेने से ब्लड प्रेशर पर सकारात्मक असर हो सकता है।

प्रेग्नेंसी (Pregnancy) के दौरान हाई ब्लड प्रेशर

हाई ब्लड प्रेशर होने पर भी महिलाएं स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं, बशर्ते प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड प्रेशर की नियमित निगरानी और सही मैनेजमेंट किया जाए। अगर इसे कंट्रोल न किया जाए तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर वाली गर्भवती महिलाओं में जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए, किडनी फंक्शन कम हो सकता है। हाई ब्लड प्रेशर वाली मां से जन्मे बच्चों का जन्म वजन कम हो सकता है या वे समय से पहले पैदा हो सकते हैं।

कुछ महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान ही हाई ब्लड प्रेशर विकसित होता है। प्रेग्नेंसी से जुड़ी हाई ब्लड प्रेशर की कई स्थितियां हो सकती हैं। अक्सर यह स्थिति बच्चे के जन्म के बाद अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन ऐसी महिलाओं में आगे चलकर जीवन में दोबारा हाई ब्लड प्रेशर होने का खतरा बढ़ जाता है।

प्री-एक्लेम्पसिया (Preeclampsia)

कुछ मामलों में हाई ब्लड प्रेशर वाली गर्भवती महिलाओं में प्री-एक्लेम्पसिया नाम की गंभीर स्थिति विकसित हो सकती है। इसमें ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और किडनी सहित कई अंगों पर बुरा असर पड़ सकता है। इससे यूरिन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है, लिवर फंक्शन में गड़बड़ी, फेफड़ों में फ्लूइड जमा होना और आंखों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

जैसे-जैसे यह स्थिति बिगड़ती है, मां और बच्चे दोनों के लिए खतरा बढ़ता जाता है। प्री-एक्लेम्पसिया से एक्लेम्पसिया (Eclampsia) हो सकता है, जिसमें दौरे (Seizures) पड़ते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याएं अब भी मातृ मृत्यु (Maternal Death) के प्रमुख कारणों में से एक मानी जाती हैं। बच्चे के लिए जटिलताओं में कम जन्म वजन, समय से पहले जन्म और मृत जन्म (Stillbirth) शामिल हो सकते हैं।

फिलहाल प्री-एक्लेम्पसिया को पूरी तरह रोकने का कोई निश्चित तरीका नहीं है और इस स्थिति का एकमात्र निश्चित इलाज बच्चे का जन्म कराना है। अगर प्रेग्नेंसी के दौरान आपको यह समस्या हो जाए, तो डॉक्टर आपकी और बच्चे की सेहत की बहुत नजदीकी से निगरानी करेंगे।

हाई ब्लड प्रेशर का शरीर पर क्या असर पड़ता है?

क्योंकि हाइपरटेंशन अक्सर बिना लक्षण के रहता है, इसलिए यह कई सालों तक शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है और पता भी नहीं चलता। अगर हाई ब्लड प्रेशर का इलाज न किया जाए, तो यह गंभीर और जानलेवा जटिलताओं का कारण बन सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर से होने वाली जटिलताओं में ये शामिल हैं:

धमनियों को नुकसान

स्वस्थ धमनियां मजबूत और लचीली होती हैं। इनमें खून आसानी से और बिना रुकावट के बहता है। हाई ब्लड प्रेशर से धमनियां सख्त, संकरी और कम लचीली हो जाती हैं। ऐसी धमनियों में खाने से मिलने वाली चर्बी और कोलेस्ट्रॉल आसानी से जमा हो जाते हैं और खून के बहाव को रोकते हैं। इससे ब्लड प्रेशर और बढ़ सकता है, धमनियां बंद हो सकती हैं और आगे चलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

दिल को नुकसान

हाई ब्लड प्रेशर से दिल को सामान्य से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। धमनियों में दबाव बढ़ने से दिल की मांसपेशियों को ज्यादा ताकत से और ज्यादा बार खून पंप करना पड़ता है।

इससे दिल का आकार बढ़ सकता है, जिसे कार्डियोमेगली (Cardiomegaly) कहा जाता है। इससे इन समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है:

  • हार्ट फेल्योर (Heart Failure)
  • अरिदमिया (Arrhythmia) यानी दिल की धड़कन का अनियमित होना
  • अचानक दिल का बंद हो जाना (Sudden Cardiac Death)
  • हार्ट अटैक

दिमाग को नुकसान

दिमाग के सही काम करने के लिए ऑक्सीजन से भरपूर खून की लगातार सप्लाई जरूरी है। हाई ब्लड प्रेशर दिमाग तक पहुंचने वाले खून के बहाव को कम कर सकता है:

  • दिमाग में खून के बहाव में अस्थायी रुकावट को ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (Transient Ischemic Attack - TIA) कहा जाता है।
  • जब खून के बहाव में गंभीर रुकावट होती है तो दिमाग की कोशिकाएं मरने लगती हैं, जिसे स्ट्रोक कहा जाता है।


अनकंट्रोल्ड हाई ब्लड प्रेशर (Uncontrolled high blood pressure) आपकी याददाश्त, सीखने की क्षमता, बोलने और तर्क करने की क्षमता पर भी असर डाल सकता है। हाइपरटेंशन का इलाज शुरू करने से पहले से हुए नुकसान को पूरी तरह उलट पाना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन इससे आगे होने वाले नुकसान और जटिलताओं का खतरा काफी कम किया जा सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर: बचाव के लिए जरूरी टिप्स

अगर आपके अंदर हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम फैक्टर मौजूद हैं, तो आप अभी से कुछ कदम उठाकर इस बीमारी और इसकी जटिलताओं का खतरा कम कर सकते हैं।

डाइट में हेल्दी फूड शामिल करें

धीरे-धीरे अपनी डाइट में दिल के लिए फायदेमंद पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों की मात्रा बढ़ाएं। कोशिश करें कि दिन में कम से कम सात सर्विंग फल और सब्जियां खाएं। फिर दो हफ्तों तक हर दिन एक अतिरिक्त सर्विंग और जोड़ें। इसके बाद अगले दो हफ्तों के लिए फिर एक सर्विंग और बढ़ाएं। लक्ष्य यह होना चाहिए कि आप दिन में लगभग दस सर्विंग फल और सब्जियां ले सकें।

थाली की सोच बदलें

हम अक्सर प्लेट में ज्यादा हिस्सा मीट या भारी खाने को देते हैं और सब्जियों को साइड डिश की तरह रखते हैं। इसकी जगह ऐसा सोचें कि सब्जियां और सलाद आपकी प्लेट का बड़ा हिस्सा हों और मीट या नॉन-वेज सिर्फ थोड़ा सा हिस्सा हो। यानी बड़े स्टेक (Steak) के साथ थोड़ा सलाद खाने की बजाय, बड़ा सलाद लें और उसके ऊपर थोड़ी मात्रा में मीट या चिकन रखें।

चीनी कम करें

फ्लेवर्ड योगर्ट, मीठे सीरियल, कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेज्ड जूस जैसे शुगर-स्वीटेंड फूड्स को कम करने की कोशिश करें। पैकेज्ड फूड में अक्सर छिपी हुई चीनी होती है, इसलिए लेबल ध्यान से पढ़ें।

वजन घटाने के स्पष्ट लक्ष्य बनाएं

सिर्फ इतना कहने की बजाय कि “वजन कम करना है”, अपने डॉक्टर से मिलकर अपने लिए हेल्दी वजन का लक्ष्य तय करें। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, हफ्ते में लगभग 0.5 से 1 किलो तक वजन कम करना सुरक्षित माना जाता है। इसके लिए रोजाना अपनी सामान्य डाइट से लगभग 500 कैलोरी कम लेना और शारीरिक गतिविधि बढ़ाना मददगार हो सकता है।

व्यायाम के लिए भी यथार्थवादी लक्ष्य बनाएं। अगर हफ्ते में पांच दिन व्यायाम करना अभी मुश्किल लगता है, तो फिलहाल अपने रूटीन से एक दिन ज्यादा जोड़ें। जब यह आराम से होने लगे, तब एक और दिन बढ़ाएं। इस तरह धीरे-धीरे आप नियमित एक्सरसाइज की आदत बना सकते हैं और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा कम कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: हाई ब्लड प्रेशर को 'साइलेंट किलर' क्यों कहा जाता है?
उत्तर: हाइपरटेंशन को 'साइलेंट किलर' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके शुरुआती चरणों में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। बहुत से लोगों को तब तक पता नहीं चलता कि उन्हें हाई बीपी है, जब तक कि उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे दिल या किडनी को नुकसान न पहुँच जाए। नियमित जांच ही इसका पता लगाने का एकमात्र तरीका है।

प्रश्न: ब्लड प्रेशर की नॉर्मल रेंज क्या होती है?
उत्तर: एक स्वस्थ वयस्क के लिए 120/80 mm Hg से कम ब्लड प्रेशर को सामान्य (Normal) माना जाता है। यदि आपका सिस्टोलिक प्रेशर 130-139 के बीच या डायस्टोलिक 80-89 के बीच रहता है, तो इसे स्टेज 1 हाइपरटेंशन की श्रेणी में रखा जाता है।

प्रश्न: क्या नमक कम करने से ब्लड प्रेशर वाकई कम होता है?
उत्तर: हाँ, सोडियम का सेवन कम करना बीपी कंट्रोल करने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है। ज्यादा नमक शरीर में पानी को रोकता है, जिससे धमनियों पर दबाव बढ़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हाई बीपी वाले मरीजों को दिन भर में 1500 मिलीग्राम से ज्यादा सोडियम नहीं लेना चाहिए।

प्रश्न: क्या हाई बीपी की दवाएं एक बार शुरू होने पर जीवनभर लेनी पड़ती हैं?
उत्तर: यह आपकी स्थिति पर निर्भर करता है। कई लोग वजन घटाने, सही डाइट (जैसे DASH डाइट) और नियमित व्यायाम के जरिए अपना ब्लड प्रेशर इतना कम कर लेते हैं कि डॉक्टर उनकी दवा की खुराक कम कर देते हैं या बंद कर देते हैं। हालांकि, बिना डॉक्टरी सलाह के कभी भी दवा खुद से बंद नहीं करनी चाहिए।

प्रश्न: हाइपरटेंसिव क्राइसिस क्या है और इसमें क्या करना चाहिए?
उत्तर: जब ब्लड प्रेशर अचानक 180/120 mm Hg या उससे अधिक हो जाता है, तो इसे हाइपरटेंसिव क्राइसिस कहते हैं। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है। यदि इस स्थिति में तेज सिरदर्द, सीने में दर्द या धुंधला दिखाई देने जैसे लक्षण हों, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता (Emergency Room) लेनी चाहिए।

Recent Blogs


Disclaimer : Zeelab Pharmacy provides health information for knowledge only. Do not self-medicate. Always consult a qualified doctor before starting, stopping, or changing any medicine or treatment.


medicine cart

₹ 0

0

Items added


2026 Copyright By © Zeelab Pharmacy Private Limited. All Rights Reserved

Our Payment Partners

card
correct iconAdded!