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फार्मा और हेल्थकेयर एनालिटिक्स भारत में अगली बड़ी आवश्यकता बनने जा रही है

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भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग आज एक बड़े योगदानकर्ता के रूप में दुनिया भर की फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में उभरा है। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (FICCI) की रिपोर्ट के अनुसार, “भारत दुनिया का सबसे बड़ा जेनेरिक दवाओं (Generic Drugs) का सप्लायर है। भारतीय फार्मास्युटिकल सेक्टर दुनिया भर में अलग‑अलग वैक्सीन की कुल मांग का 50 प्रतिशत से अधिक, दुनिया भर की जेनेरिक दवाओं की अमेरिकी बाजार में 40 प्रतिशत मांग को पूरा करता है, और यूके में उपयोग होने वाली कुल दवाओं का लगभग 25 प्रतिशत भारतीय कंपनियाँ सप्लाई करती हैं। वर्तमान में एड्स (Acquired Immune Deficiency Syndrome) के इलाज के लिए दुनिया भर में उपयोग होने वाली 80 प्रतिशत से अधिक एंटीरेट्रोवायरल दवाएँ भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनियाँ उपलब्ध कराती हैं।”

साल 2017 में भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग का मूल्य लगभग 33 अरब डॉलर था। यह उद्योग 2015 से 2020 के बीच 22.4 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर अनुमानित रूप से 55 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। भारत का फार्मास्युटिकल निर्यात 2017-18 में 17.27 अरब डॉलर रहा। 2018-19 में इसके 19 अरब डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है।

भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनियाँ मुख्य रूप से दो बड़े सेगमेंट्स पर काम करती हैं — API’s (Active Pharmaceutical Ingredients) और फॉर्म्युलेशन (Formulations)। API या बल्क ड्रग्स वे केमिकल इंग्रेडिएंट्स होते हैं जिनका उपयोग फॉर्म्युलेशन बनाने के लिए किया जाता है। फॉर्म्युलेशन वे अंतिम तैयार प्रोडक्ट होते हैं जो अलग‑अलग प्रकार की बीमारियों के इलाज के लिए बनाए जाते हैं और ये टैबलेट, इंजेक्शन, सिरप आदि के रूप में उपलब्ध होते हैं। बल्क ड्रग्स और फॉर्म्युलेशन दोनों ही आमतौर पर ब्रांडेड और जेनेरिक, दोनों रूपों में मिलते हैं। ब्रांडेड प्रोडक्ट वे होते हैं जिन्हें संबंधित कंपनी ने खुद विकसित कर पेटेंट कराया होता है। जेनेरिक प्रोडक्ट्स वे दवाएँ होती हैं जो फॉर्म्युलेशन, उपयोग और असर के मामले में ब्रांडेड दवाओं के बिल्कुल समान होती हैं। ये जेनेरिक दवाएँ तब बनाई जाती हैं जब इनोवेटर कंपनी का पेटेंट खत्म हो जाता है। जेनेरिक दवाएँ ब्रांडेड दवाओं की तुलना में काफी सस्ती होती हैं। भारतीय फार्मा इंडस्ट्री की कुल आय का लगभग 70% हिस्सा जेनेरिक दवाओं से आता है।

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