हिचकी की दवा
हिचकी की दवा का उपयोग मुख्य रूप से डायफ्राम (डायाफ्राम) में होने वाले अनैच्छिक ऐंठन (स्पैज़्म) और अचानक “हिक” जैसी आवाज़ को रोकने के लिए किया जाता है, जो वोकल कॉर्ड्स के तेजी से बंद होने पर होती है। हिचकी की दवाओं का उद्देश्य उन लगातार हिचकियों को खत्म करना होता है जो अपने आप ठीक नहीं होतीं। ये दवाएं हिचकी के मूल कारण को ठीक करने, हिचकी को ट्रिगर करने वाले नर्व सिग्नल्स को ब्लॉक करने और डायफ्राम की मांसपेशियों को आराम देने का काम करती हैं।
भारत में हिचकी के लिए इस्तेमाल होने वाली जेनेरिक दवाओं की सूची:
| दवा का नाम | फायदे |
|---|---|
| Baclofen | डायफ्राम की मांसपेशियों को आराम देता है, लंबे समय से चल रही हिचकी में उपयोगी |
| Chlorpromazine | लगातार बनी रहने वाली हिचकी में उपयोग |
| Metoclopramide | पेट की परेशानी को कम करता है और हिचकी को रोकने में मदद करता है |
| Gabapentin | हिचकी के इलाज में सहायक |
Baclofen
Baclofen एक मसल रिलैक्सेंट दवा है, जो मांसपेशियों की जकड़न, ऐंठन और दर्द को कम करने के लिए दी जाती है। यह दवा नर्व सिस्टम पर काम करके अनावश्यक नर्व सिग्नल्स को शांत करती है, जिससे मांसपेशियों को आराम मिलता है और हिचकी जैसी समस्या में भी राहत मिलती है।
Chlorpromazine
Chlorpromazine एक एंटीसाइकोटिक दवा है, जिसका उपयोग स्किज़ोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर और गंभीर व्यवहार संबंधी समस्याओं में किया जाता है। यह उन हिचकियों में भी असरदार है जो सामान्य इलाज से ठीक नहीं होतीं। यह दिमाग के रसायनों को संतुलित करके मन को शांत करता है और हिचकी को नियंत्रित करता है।
Metoclopramide
Metoclopramide का उपयोग उल्टी, मतली और पाचन संबंधी समस्याओं में किया जाता है। यह पेट और आंतों की गति को बेहतर बनाता है, जिससे खाना जल्दी पचता है और पेट की गड़बड़ी से होने वाली हिचकी में राहत मिलती है।
Gabapentin
Gabapentin नर्व से जुड़े दर्द और मिर्गी के इलाज में उपयोग की जाती है। यह दिमाग और रीढ़ की हड्डी में असामान्य नर्व गतिविधि को शांत करती है। कुछ मामलों में यह लगातार चल रही हिचकी को भी नियंत्रित करने में मदद करती है।
भारत में हिचकी के लिए Zeelab की दवाएं
| दवा का नाम | एमआरपी |
|---|---|
| Baclozee 10 Tablet | ₹40 |
| Clorprox 50 Tablet | ₹8 |
| Metavom 10 Tablet | ₹10 |
| Gabatix 100 Tablet | ₹12.5 |
हिचकी की दवाओं के फायदे
- लगातार चल रही हिचकी को रोकने में मदद
- नींद की गुणवत्ता में सुधार
- खाने-पीने में होने वाली परेशानी से राहत
- तनाव और घबराहट से जुड़ी हिचकी को कम करता है
- हिचकी के मूल कारण पर काम करता है
- तेज़ और असरदार राहत प्रदान करता है
- लगातार हिचकी से होने वाली जलन और दर्द को कम करता है
हिचकी की दवाएं कैसे काम करती हैं?
हिचकी की दवाएं दिमाग और पेट से जुड़े नर्व सिग्नल्स को नियंत्रित करके डायफ्राम की ऐंठन को रोकती हैं, जिससे हिचकी पर नियंत्रण पाया जाता है।
किन बातों से बचें?
- दवा के साथ शराब का सेवन न करें
- बहुत ठंडा, बहुत गर्म या गैस वाले पेय से बचें
- अत्यधिक तनाव और चिंता से दूर रहें
डॉक्टर से कब मिलें?
- अगर हिचकी 48 घंटे से ज्यादा समय तक रहे
- अगर यह खाने, सोने या सांस लेने में बाधा डाले
- अगर हिचकी से दर्द या अत्यधिक थकान हो
- अगर वजन कम होना, बुखार या सीने में जलन जैसी समस्या हो
सारांश
हिचकी की दवाएं आमतौर पर तब दी जाती हैं जब हिचकी 48 घंटे से अधिक समय तक बनी रहे। सही समय पर पहचान, उचित इलाज और मूल कारण को ठीक करना हिचकी से राहत पाने के सबसे प्रभावी तरीके हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q: हिचकी की दवा कैसे लें?
A: दवा हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लें।
Q: हिचकी की दवा कब लेनी चाहिए?
A: जब हिचकी 48 घंटे से ज्यादा समय तक बनी रहे या बहुत ज्यादा परेशान करे।
Q: क्या हिचकी की दवाएं सुरक्षित होती हैं?
A: आमतौर पर ये सुरक्षित होती हैं, लेकिन कुछ लोगों में नींद या सुस्ती आ सकती है।
Q: क्या हिचकी घरेलू उपायों से ठीक हो सकती है?
A: हल्की और अस्थायी हिचकी अक्सर घरेलू उपायों जैसे ठंडा पानी पीने, सांस रोकने या शहद लेने से ठीक हो सकती है। लेकिन अगर हिचकी लंबे समय तक बनी रहे, तो दवा और डॉक्टर की सलाह जरूरी होती है।
Q: आयुर्वेदिक नजरिए से हिचकी क्यों होती है?
A: आयुर्वेद के अनुसार हिचकी वात दोष के असंतुलन के कारण होती है, जिससे डायफ्राम और श्वसन नलिकाओं में अनियमित गति होने लगती है।
Q: क्या बच्चों में हिचकी के लिए दवा देना सुरक्षित है?
A: बच्चों में हिचकी आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाती है। यदि हिचकी लंबे समय तक बनी रहे, तो बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा नहीं देनी चाहिए।
Q: क्या बार-बार हिचकी आना किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है?
A: हाँ, लगातार और बार-बार होने वाली हिचकी कभी-कभी पाचन, नर्वस सिस्टम या किसी अन्य अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकती है।
Q: क्या हिचकी की दवाओं से आदत (लत) लग सकती है?
A: आमतौर पर हिचकी की दवाएं लत नहीं लगातीं, लेकिन इन्हें लंबे समय तक केवल डॉक्टर की निगरानी में ही लेना चाहिए।
Q: हिचकी के दौरान खान-पान में क्या सावधानी रखनी चाहिए?
A: हल्का, सुपाच्य भोजन लें और बहुत ठंडा, बहुत गर्म या मसालेदार खाना खाने से बचें, ताकि हिचकी बढ़े नहीं।
Q: क्या तनाव से हिचकी बढ़ सकती है?
A: जी हाँ, मानसिक तनाव और चिंता से नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है, जिससे हिचकी की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए मन को शांत रखना जरूरी है।
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