भारत में लो ब्लड प्रेशर (हाइपोटेंशन) की दवा
हाइपोटेंशन यानी लो ब्लड प्रेशर की दवाइयाँ आमतौर पर तब दी जाती हैं, जब बिना दवा वाले उपाय जैसे पर्याप्त पानी पीना, नमक का सेवन बढ़ाना और जीवनशैली में बदलाव असरदार नहीं होते। ये दवाइयाँ शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ाने और रक्त वाहिकाओं को संकुचित करने का काम करती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर सामान्य स्तर पर आता है। खासतौर पर ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन (बैठने या खड़े होने पर अचानक ब्लड प्रेशर गिरना) में इनका उपयोग किया जाता है। मिडोड्रिन टैबलेट, ड्रॉक्सीडोपा कैप्सूल, नॉरएपिनेफ्रिन और डोपामिन इंजेक्शन ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन, न्यूरोजेनिक और कार्डियोजेनिक शॉक के इलाज में दी जाती हैं। वहीं आयुर्वेद में मुलेठी, रोज़मेरी, अदरक और तुलसी जैसी जड़ी-बूटियाँ लो ब्लड प्रेशर को प्राकृतिक रूप से संतुलित करने में सहायक मानी जाती हैं। किसी भी दवा या आयुर्वेदिक उपाय का सेवन डॉक्टर की सलाह अनुसार ही करें।
लो ब्लड प्रेशर (हाइपोटेंशन) के लिए दवाइयाँ
लो ब्लड प्रेशर की समस्या में चक्कर आना, कमजोरी, थकान और बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। जब खानपान और जीवनशैली में बदलाव पर्याप्त नहीं होते, तब डॉक्टर ब्लड प्रेशर को स्थिर रखने के लिए दवाइयाँ लिखते हैं। नीचे आमतौर पर उपयोग की जाने वाली दवाइयों की जानकारी दी गई है।
| दवा का नाम | विवरण | उपयोग |
|---|---|---|
| Fludrocortisone | यह दवा शरीर में सोडियम और पानी को बनाए रखती है, जिससे रक्त की मात्रा बढ़ती है और ब्लड प्रेशर ऊपर आता है। | लंबे समय से चला आ रहा या ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन |
| Midodrine | यह रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर रक्त संचार बेहतर बनाती है और ब्लड प्रेशर बढ़ाती है। | पोश्चर या ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन |
| Droxidopa | यह शरीर में नॉरएपिनेफ्रिन का स्तर बढ़ाकर ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करती है। | न्यूरोजेनिक ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन |
| Pyridostigmine | यह नसों से रक्त वाहिकाओं तक सिग्नल को मजबूत बनाकर लो बीपी के लक्षण कम करती है। | अन्य दवाओं के साथ बेहतर नियंत्रण हेतु |
| Erythropoietin (EPO) | एनीमिया से पीड़ित मरीजों में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण बढ़ाकर रक्त संचार सुधारती है। | एनीमिया से जुड़ा लो ब्लड प्रेशर |
| Caffeine | नर्वस सिस्टम को उत्तेजित कर अस्थायी रूप से लो बीपी के लक्षणों से राहत देती है। | थकान और चक्कर में त्वरित राहत |
| NSAIDs (Indomethacin) | यह किडनी फंक्शन और रक्त वाहिकाओं के टोन पर असर डालकर ब्लड प्रेशर बढ़ाने में मदद कर सकती है। | चुनिंदा मामलों में डॉक्टर की निगरानी में |
लो बीपी के लिए प्रमुख दवाइयों की जानकारी
फ्लुड्रोकोर्टिसोन (Fludrocortisone)
यह दवा शरीर में नमक और पानी को बनाए रखती है, जिससे रक्त की मात्रा बढ़ती है और ब्लड प्रेशर संतुलित होता है।
मिडोड्रिन (Midodrine)
यह दवा रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर रक्त प्रवाह बेहतर बनाती है और बैठने या खड़े होने पर होने वाले लो बीपी में उपयोगी है।
ड्रॉक्सीडोपा (Droxidopa)
यह नर्वस सिस्टम से जुड़ी समस्या के कारण होने वाले लो ब्लड प्रेशर में विशेष रूप से लाभकारी है।
पाइरिडोस्टिग्मीन (Pyridostigmine)
यह नसों के सिग्नल को बेहतर बनाकर ब्लड प्रेशर गिरने के लक्षणों को कम करती है।
एरिथ्रोपोइटिन (EPO)
एनीमिया के कारण होने वाले लो ब्लड प्रेशर में यह दवा रक्त संचार सुधारने में सहायक होती है।
कैफीन (Caffeine)
यह स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन कभी-कभी लो बीपी से जुड़ी थकान और चक्कर में राहत दे सकती है।
एनएसएआईडी (Indomethacin)
कुछ विशेष स्थितियों में डॉक्टर की सलाह से इसका उपयोग किया जाता है।
लो ब्लड प्रेशर की सबसे अच्छी टैबलेट
लो ब्लड प्रेशर की सही दवा मरीज की स्थिति और कारण पर निर्भर करती है। आमतौर पर फ्लुड्रोकोर्टिसोन, मिडोड्रिन और ड्रॉक्सीडोपा को प्रभावी लो बीपी टैबलेट माना जाता है। इनका सेवन हमेशा डॉक्टर की सलाह अनुसार करें।
हाइपोटेंशन के लिए आयुर्वेदिक और हर्बल उपचार
आयुर्वेद में लो ब्लड प्रेशर के उपचार का उद्देश्य शरीर की ऊर्जा बढ़ाना, पाचन सुधारना और दोषों का संतुलन बनाए रखना होता है। जड़ी-बूटियाँ, संतुलित आहार और सही दिनचर्या इसमें अहम भूमिका निभाती हैं।
हाइपोटेंशन में राहत के लिए हर्बल दवाइयाँ
| दवा का नाम | संघटक (Composition) | लाभ |
|---|---|---|
| मुलेठी (Licorice Root) | ग्लाइसिर्रिज़िन (Glycyrrhizin) | कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ाकर सोडियम की कमी को कम करती है और ब्लड प्रेशर बढ़ाने में मदद करती है। |
| रोज़मेरी (Rosemary) | कार्नोसिक एसिड, रोज़मेरीनिक एसिड | रक्त संचार को बेहतर बनाती है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायक है। |
| अदरक (Ginger) | जिंजरॉल, शोगाओल | रक्त प्रवाह सुधारता है और लो ब्लड प्रेशर को संतुलित करने में मदद करता है। |
| जिनसेंग (Ginseng) | जिनसेनोसाइड्स | लो बीपी मरीजों में ब्लड प्रेशर बढ़ाने और हृदय स्वास्थ्य को सपोर्ट करने में सहायक है। |
| एंजेलिका (Angelica) | फेरुलिक एसिड, Z-लिगुस्टिलाइड | रक्त संचार सुधारती है और हाइपोटेंशन में ब्लड प्रेशर बढ़ाने में मदद करती है। |
| हॉथॉर्न (Hawthorn) | क्वेरसेटिन, प्रोएन्थोसाइनिडिन्स | हृदय की कार्यक्षमता सुधारता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है। |
| एस्ट्रागैलस (Astragalus) | सैपोनिन्स, फ्लेवोनॉयड्स, पॉलीसैकराइड्स | हार्मोनल असंतुलन को नियंत्रित कर रक्त संचार बेहतर बनाता है। |
| गोटू कोला (Gotu Kola) | ट्राइटरपेनॉइड्स, एशियाटिकोसाइड | रक्त प्रवाह और मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बेहतर करता है। |
| काली चाय (Black Tea) | थीअफ्लेविन्स, कैफीन | अस्थायी रूप से ब्लड प्रेशर बढ़ाने में मदद करती है। |
हर्बल दवाइयों की खुराक हमेशा डॉक्टर या वैद्य की सलाह अनुसार ही लें।
हाइपोटेंशन की दवाइयों के लाभ
- ब्लड प्रेशर बढ़ाती हैं: लो ब्लड प्रेशर को सामान्य स्तर पर लाने में मदद करती हैं।
- रक्त संचार सुधारती हैं: चक्कर, बेहोशी और गिरने के जोखिम को कम करती हैं।
- ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन में लाभकारी: अचानक खड़े होने पर बीपी गिरने से बचाती हैं।
- हृदय के कार्य को सपोर्ट करती हैं।
- न्यूरोजेनिक और सेप्टिक शॉक के खतरे को कम करती हैं।
हाइपोटेंशन की दवाइयों का उपयोग किस लिए किया जाता है?
जब ब्लड प्रेशर बहुत कम हो जाता है, खासकर खड़े होने पर (ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन), तब इसे नियंत्रित करने के लिए इन दवाइयों का उपयोग किया जाता है।
हाइपोटेंशन की दवा कैसे लें?
दवा हमेशा डॉक्टर द्वारा बताई गई खुराक और अवधि के अनुसार लें। निर्धारित मात्रा से अधिक दवा न लें।
हाइपोटेंशन की दवा कैसे काम करती है?
ये दवाइयाँ शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ाकर, रक्त वाहिकाओं को संकुचित करके और तरल व इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को नियंत्रित करके काम करती हैं।
एंटी-हाइपोटेंसिव दवा कब लेनी चाहिए?
ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए दवा रोज़ एक ही समय पर लेना बेहतर होता है। हमेशा डॉक्टर की सलाह का पालन करें।
क्या सावधानी रखें?
शराब से बचें: दवा लेने के बाद शराब का सेवन न करें, क्योंकि इससे ब्लड प्रेशर और गिर सकता है।
डॉक्टर से परामर्श के बिना अन्य दवाओं के साथ इसका सेवन न करें, विशेषकर पार्किंसन की दवाइयाँ (लेवोडोपा), हाई बीपी की दवाइयाँ (एनालाप्रिल) और एंटीडिप्रेसेंट्स (अमिट्रिप्टिलीन), क्योंकि इनके साथ ब्लड प्रेशर ज्यादा गिर सकता है।
हाइपोटेंशन को नियंत्रित करने के सामान्य उपाय
- पर्याप्त पानी पिएँ: डिहाइड्रेशन से बचने के लिए खूब पानी पिएँ।
- नियमित व्यायाम: हल्का व्यायाम, योग और ध्यान करें।
- नमक का सेवन: डॉक्टर की सलाह से पर्याप्त नमक लें।
- खानपान की आदतें: छोटे-छोटे भोजन करें और अच्छी तरह चबाकर खाएँ।
- कंप्रेशन स्टॉकिंग्स: पैरों में दबाव देकर रक्त संचार सुधारती हैं।
- पोज़िशन बदलते समय सावधानी: अचानक खड़े होने से बचें।
- कैफीन: कॉफी और काली चाय में मौजूद कैफीन अस्थायी रूप से बीपी बढ़ा सकता है।
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डॉक्टर से कब संपर्क करें?
- दवा लेने के बावजूद ब्लड प्रेशर बहुत कम बना रहे।
- दवा लेने के बाद अधिक चक्कर, कमजोरी या घबराहट महसूस हो।
- ध्यान केंद्रित करने में परेशानी या भ्रम की स्थिति हो।
- दृष्टि से संबंधित कोई समस्या दिखाई दे।
- सांस लेने में तकलीफ हो।
- सीने में दर्द महसूस हो।
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सारांश
हाइपोटेंशन की दवाइयाँ ब्लड प्रेशर बढ़ाने, रक्त संचार सुधारने और शरीर के तरल संतुलन को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। सही दवा का चयन मरीज की स्थिति और कारण पर निर्भर करता है। ड्रॉक्सीडोपा कैप्सूल, मिडोड्रिन टैबलेट, मेफेंटर्मिन और नॉरएपिनेफ्रिन इंजेक्शन आमतौर पर उपयोग की जाने वाली जेनेरिक दवाइयाँ हैं। वहीं मुलेठी, अदरक, एंजेलिका, गोटू कोला और काली चाय जैसी प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ सुरक्षित और प्रभावी मानी जाती हैं। पर्याप्त पानी पीना, नियमित व्यायाम, सही नमक सेवन, संतुलित आहार, कंप्रेशन स्टॉकिंग्स और कैफीन भी ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने में सहायक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न: एंटी-हाइपोटेंसिव दवाइयाँ क्या हैं?
उत्तर: ये दवाइयाँ लो ब्लड प्रेशर को सामान्य स्तर पर लाने के लिए उपयोग की जाती हैं और चक्कर, कमजोरी व थकान जैसे लक्षण कम करती हैं।
प्रश्न: इन्हें कब दिया जाता है?
उत्तर: जब ब्लड प्रेशर बहुत कम हो या खड़े होने पर अचानक गिरता हो (ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन)।
प्रश्न: क्या इसके साइड इफेक्ट होते हैं?
उत्तर: आमतौर पर गंभीर साइड इफेक्ट नहीं होते, लेकिन कुछ लोगों में पानी रुकना या सिरदर्द हो सकता है।
प्रश्न: क्या इन्हें अन्य दवाओं के साथ ले सकते हैं?
उत्तर: अन्य दवाओं के साथ लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है।
प्रश्न: गर्भावस्था में क्या ये दवाइयाँ ली जा सकती हैं?
उत्तर: गर्भावस्था में कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श आवश्यक है।
प्रश्न: ठीक महसूस होने पर क्या दवा बंद कर सकते हैं?
उत्तर: नहीं, बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें।
प्रश्न: अगर खुराक छूट जाए तो क्या करें?
उत्तर: याद आते ही दवा लें। यदि अगली खुराक का समय पास हो तो छूटी हुई खुराक न लें और दोहरी मात्रा न लें।
प्रश्न: क्या लो ब्लड प्रेशर जानलेवा हो सकता है?
उत्तर: सामान्य मामलों में नहीं, लेकिन यदि लो बीपी अचानक बहुत गिर जाए या शॉक से जुड़ा हो, तो यह गंभीर हो सकता है और तुरंत इलाज जरूरी होता है।
प्रश्न: लो ब्लड प्रेशर में सुबह ज्यादा समस्या क्यों होती है?
उत्तर: सुबह शरीर में पानी की कमी, लंबे समय तक लेटे रहने और हार्मोनल बदलाव के कारण बीपी कम हो सकता है।
प्रश्न: क्या आयुर्वेदिक और एलोपैथिक दवाइयाँ साथ ली जा सकती हैं?
उत्तर: कुछ मामलों में ली जा सकती हैं, लेकिन किसी भी संयोजन से पहले डॉक्टर या वैद्य से सलाह जरूरी है।
प्रश्न: लो ब्लड प्रेशर में कौन-से लक्षण नजरअंदाज नहीं करने चाहिए?
उत्तर: बार-बार बेहोशी, सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत और भ्रम की स्थिति को गंभीरता से लेना चाहिए।
प्रश्न: क्या डाइट बदलने से लो बीपी कंट्रोल हो सकता है?
उत्तर: हां, पर्याप्त नमक, पानी, संतुलित आहार और छोटे-छोटे भोजन लो बीपी को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
प्रश्न: लो ब्लड प्रेशर में कौन-सी एक्सरसाइज सुरक्षित होती है?
उत्तर: हल्की वॉक, योग, प्राणायाम और स्ट्रेचिंग सुरक्षित मानी जाती हैं, जबकि अचानक भारी एक्सरसाइज से बचना चाहिए।
प्रश्न: क्या लो बीपी की दवाइयाँ लंबे समय तक लेनी पड़ती हैं?
उत्तर: यह मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। कुछ लोगों को लंबे समय तक और कुछ को अस्थायी रूप से दवा दी जाती है।
प्रश्न: क्या तनाव और नींद की कमी से लो ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है?
उत्तर: हां, लगातार तनाव और नींद की कमी शरीर की ऊर्जा कम कर बीपी को और गिरा सकती है।
Ginseng Extract Powder (42.5 mg) + Vitamin A (750 mcg) + Vitamin B1 (1 mg) + Vitamin B2 (1.5 mg) + Vitamin B6 (1 mg) + Vitamin B12 (1 mcg) + Vitamin C (50 mg) + Vitamin D3 (5 mcg) + Vitamin E (5 mg) + Folic Acid (150 mcg) + Vitamin B3 (10 mg) + Vitamin B5 (5 mg) + Calcium (75 mg) + Phosphorus (58 mg) + Copper (0.5 mg) + Iodine (0.1 mg) + Ferrous Fumarate (30 mg) + Magnesium (3 mg) + Manganese (0.5 mg) + Potassium (2 mg) + Zinc (10 mg)
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