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महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक के लक्षण: यह सिर्फ सीने के दर्द तक सीमित नहीं

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Published On : 09 Dec, 2025 | Written By : Aprajita Anand | Reviewed By : Dr. Anubhav Singh

महिलाओं में लगभग 45% हार्ट अटैक ऐसे होते हैं जिनमें कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, जिन्हें हम साइलेंट हार्ट अटैक कहते हैं। इनमें सीने में तेज दर्द या बेहोश होने जैसे संकेत नहीं होते। इसके बजाय हल्की बेचैनी, थकान, पेट खराब होना या घबराहट महसूस हो सकती है। चूंकि ये लक्षण आम जीवन की परेशानियों जैसे तनाव, हार्मोनल बदलाव, एसिडिटी या अधिक काम की वजह से लगते हैं, इसलिए ज्यादातर महिलाएं इन्हें अनदेखा कर देती हैं।  

यह लापरवाही बेहद खतरनाक हो सकती है। शोध बताते हैं कि महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से काफी अलग होते हैं। इसका कारण हार्मोन में बदलाव, पतली धमनियां, सूजन पर अलग प्रतिक्रिया और जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं जैसे डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और अत्यधिक तनाव हैं। 

समस्या यह है कि आमतौर पर महिलाओं को हार्ट अटैक के पारंपरिक लक्षण नहीं दिखते। कई बार सीने में दर्द बिल्कुल नहीं होता। इसके बजाय महिलाएं असामान्य थकान, सांस फूलना, पाचन गड़बड़ी, पेट में मरोड़, जबड़े या पीठ में दर्द, चक्कर या कमजोरी महसूस करती हैं।  

क्योंकि ये लक्षण सामान्य दैनिक समस्याओं जैसे लगते हैं, इसलिए इन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाता। लेकिन इन संकेतों को नजरअंदाज करना इलाज में देरी कर देता है और हार्ट की स्थिति और खराब हो सकती है। 

यह गाइड महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक के संकेतों को समझने में मदद करेगा। इसमें बताया गया है कि महिलाएं कौन से हार्ट अटैक लक्षणों को पहचान नहीं पातीं और क्यों इन संकेतों को समय पर जानना जीवन बचा सकता है। यह ब्लॉग उन छिपे हुए संकेतों को समझाता है, जो दिल की परेशानी बताते हैं, और इनके पीछे के कारणों को भी स्पष्ट करता है।  

इसके साथ ही यह इस बात पर भी रोशनी डालता है कि इन संकेतों को जल्दी कैसे पहचाना जाए। इसमें जीवनशैली में बदलाव और हृदय स्वास्थ्य के लिए आवश्यक सप्लीमेंट्स जैसे ओमेगा-3 फैटी एसिड, CoQ10 और अश्वगंधा का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा, कुछ डॉक्टरों द्वारा सुझाई गई दवाओं की भी जानकारी दी गई है जो दिल को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं।

साइलेंट हार्ट अटैक क्या होता है? 

महिलाओं में होने वाले साइलेंट हार्ट अटैक को मेडिकल भाषा में साइलेंट मायोकार्डियल इंफार्क्शन कहा जाता है। इन्हें आमतौर पर ECG, इकोकार्डियोग्राम, ट्रोपोनिन ब्लड टेस्ट या कार्डियक MRI जैसे टेस्ट के दौरान पता लगाया जाता है, जब कोई जांच या हेल्थ चेकअप किया जाता है।  

साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा होता है क्योंकि समय पर इलाज न मिलने से हृदय की मांसपेशियों को अधिक नुकसान हो सकता है। एक बार साइलेंट हार्ट अटैक होने पर दूसरी बार अटैक आने की संभावना बढ़ जाती है। इसके साथ ही अनियमित धड़कन, हार्ट फेलियर या दिल की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान होने का खतरा भी बढ़ जाता है।  

इसलिए महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक को जल्दी पहचानना और असामान्य हार्ट अटैक लक्षणों के प्रति जागरूक रहना बेहद जरूरी है, खासकर यदि उन्हें डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर या परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास हो।

महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक अधिक क्यों होते हैं?

महिलाएं अक्सर साइलेंट हार्ट अटैक के लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं, क्योंकि ये सामान्य पेट दर्द, एसीडिटी, तनाव या थकान जैसे लगते हैं। भारत में बदलती जीवनशैली और बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के चलते यह खतरा और अधिक बढ़ गया है।  

अधिकांश महिलाओं को सीने में दर्द नहीं होता, बल्कि थकान, सांस लेने में दिक्कत, पेट की परेशानी, पीठ दर्द, जबड़े का दर्द या चक्कर जैसा महसूस होता है, जिससे साइलेंट हार्ट अटैक पहचानना मुश्किल हो जाता है।  

महिलाओं में जैविक और सामाजिक कारणों को समझना बहुत जरूरी है, ताकि भारतीय महिलाओं में इन लक्षणों को समय रहते पहचाना जा सके और हार्ट की बीमारी से बचाव किया जा सके।

जैविक कारण (Biological Differences)

महिलाओं में हार्मोनल बदलाव, खासकर मेनोपॉज़ के बाद एस्ट्रोजेन की कमी, हृदय के कार्य को प्रभावित करती है और हार्ट अटैक के लक्षणों को बदल देती है। इसके अलावा महिलाओं की हृदय की धमनियां पुरुषों की तुलना में पतली होती हैं।  

इसी वजह से उन्हें हार्ट अटैक के सामान्य लक्षणों की बजाय मतली, जबड़े में दर्द, पीठ में दर्द, गर्दन में खिंचाव या अत्यधिक थकान जैसे संकेत महसूस होते हैं।  

साथ ही, शरीर का वह हिस्सा जो दिल की धड़कन और तनाव के प्रति प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है, महिलाओं में अलग तरीके से काम करता है। इसी वजह से कई बार हार्ट अटैक के संकेत गैस, पेट दर्द या चिंता जैसे लगते हैं।  

यही सूक्ष्म अंतर महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक को पहचानना मुश्किल बना देते हैं।

सामाजिक और व्यवहारिक कारण

महिलाएं अक्सर घर, परिवार और कामकाज की जिम्मेदारियों में इतनी व्यस्त रहती हैं कि थकान, बदन दर्द और सांस फूलने जैसे लक्षणों को सामान्य मान लेती हैं।  

इसी वजह से साइलेंट हार्ट अटैक के संकेत नजरअंदाज हो जाते हैं। मतली, अपच, चक्कर और पीठ दर्द जैसे लक्षणों को अक्सर एसिडिटी, कमजोरी या तनाव समझकर टाल दिया जाता है।  

कई बार डॉक्टर भी इन लक्षणों को एंग्जायटी या पैनिक अटैक समझकर गलत निदान कर देते हैं। इसके अलावा महिलाएं भावनाओं को सहने में अधिक समय लेती हैं और देर से डॉक्टर के पास जाती हैं, जिससे साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा और बढ़ जाता है।

भारत से जुड़ी विशेष स्थितियां (India-Specific Trends)

भारत में डायबिटीज, PCOS, थायरॉयड की समस्या, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापा तेजी से बढ़ रहा है, और ये सभी स्थितियां दिल पर भारी दबाव डालती हैं। भारतीय महिलाएं अक्सर इन समस्याओं को सिर्फ हार्मोनल बदलाव या जीवनशैली से जुड़ी छोटी परेशानियां मानकर नजरअंदाज कर देती हैं।  

शहरी जीवन का तनाव, घंटों तक बैठे रहकर काम करना और असंतुलित वर्क-लाइफ बैलेंस मेटाबोलिक स्वास्थ्य को और खराब कर देता है।  

इसका मतलब है कि महिलाओं में दिल से जुड़ी शुरुआती समस्याएं समय पर पकड़ में नहीं आतीं। लंबे समय तक बैठे रहना, अनियमित खाने की आदतें और ज्यादा प्रोसेस्ड कार्ब्स वाला खाना दिल की बीमारियों का जोखिम कई गुना बढ़ा देता है। यही कारण है कि साइलेंट हार्ट अटैक के लक्षण भारतीय महिलाओं में 20, 30 और 40 की उम्र में भी दिखाई देने लगे हैं

महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक (Silent Heart Attack) के मुख्य लक्षण

महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक की पहचान करना मुश्किल होता है क्योंकि इनके लक्षण बहुत हल्के, असामान्य या पारंपरिक हार्ट अटैक जैसे नहीं होते। कई महिलाएं बिना सीने में दर्द के ही हार्ट अटैक का अनुभव करती हैं।  

छाती में दर्द की जगह थकान, अपच, चक्कर, जबड़े या पीठ में दर्द, सांस लेने में दिक्कत या पेट दर्द जैसे संकेत दिखाई देते हैं। इन्हें अक्सर साधारण तनाव, हार्मोनल बदलाव, एंग्जायटी या गैस समझकर अनदेखा कर दिया जाता है। 

डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, हार्मोनल बदलाव या हाई ब्लड प्रेशर वाली महिलाओं में ये अनदेखे लक्षण और अधिक आम होते हैं। चूंकि silent myocardial infarction symptoms रोजमर्रा की समस्याओं जैसे लगते हैं, इसलिए यह जानना जरूरी है कि किन संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए।  

इन लक्षणों को समय रहते पहचानने से गंभीर नुकसान से बचा जा सकता है। Zeelab Pharmacy महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य के लिए CoQ10, Omega-3s और विटामिन जैसे बेहतरीन सप्लीमेंट्स उपलब्ध कराता है, जो दिल को मजबूत बनाए रखने में मदद करते हैं।

महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक के सूक्ष्म लक्षणों की तालिका

      लक्षण

      कैसा महसूस होता है

  महिलाएं इसे क्यों नजरअंदाज कर देती हैं

असामान्य थकान

लगातार थकान जो नींद लेने के बाद भी दूर न हो; हाथ-पैर भारी लगना; अचानक ऊर्जा खत्म हो जाना।

महिलाएं इसे काम का बोझ, एनीमिया, मेनोपॉज़, थायरॉयड या लंबे समय तक काम करने की वजह मानकर अनदेखा कर देती हैं। वे सोचती हैं कि सब कुछ संभालने के कारण थकान होना सामान्य है।

सांस फूलना

हल्के काम में या आराम करते समय भी सांस लेने में दिक्कत; पूरी सांस न ले पाने का एहसास।

इसे अक्सर एंग्जायटी, पैनिक अटैक, कम स्टैमिना या फिटनेस की कमी समझ लिया जाता है। लेकिन यह महिलाओं में हार्ट अटैक का आम संकेत है।

अपच/मतली

ऐसिडिटी, जलन, पेट फूलना, उल्टी या गैस जैसी समस्याएं।

इसे आसानी से गैस्ट्राइटिस, एसिडिटी या खाने की गड़बड़ी समझकर टाल दिया जाता है, जबकि यह साइलेंट हार्ट अटैक का बड़ा संकेत हो सकता है

जबड़े, गर्दन, पीठ और कंधों में दर्द

खिंचाव, दबाव, या हल्का दर्द जो जबड़े, गर्दन, बाएं हाथ या ऊपरी पीठ तक फैल सकता है।

इसे अक्सर गलत बैठने की आदत, तनाव, दांत की समस्या या मांसपेशियों में खिंचाव समझ लिया जाता है। लेकिन जबड़े में दर्द, पीठ दर्द और कंधे में दर्द महिलाओं में हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं

चक्कर/ठंडा पसीना

अचानक चक्कर आना, बेहोशी जैसा महसूस होना, ठंडा पसीना या कंपकंपी।

इसे हार्मोनल बदलाव, पानी की कमी या तनाव समझ लिया जाता है। जबकि चक्कर आना महिलाओं में हार्ट अटैक का नजरअंदाज किया जाने वाला संकेत है

कमजोरी / फ्लू जैसा महसूस होना

बॉडी पेन, ठंड लगना, बिना वजह थकान या हल्का बुखार जैसा महसूस होना।

इसे वायरल बुखार, तनाव या अधिक मेहनत समझा जाता है। महिलाएं क्वचित ही समझ पाती हैं कि यह साइलेंट हार्ट प्रॉब्लम का संकेत हो सकता है।

ऊपरी शरीर में असहजता

छाती, हाथों, कंधों या पीठ में दबाव या भारीपन, बिना तेज दर्द के।

इसे अक्सर मांसपेशियों में खिंचाव समझा जाता है। कई महिलाओं को हार्ट अटैक में छाती का दर्द नहीं होता, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।

नींद में परेशानी

नींद टूटना, रात में घबराहट, बेचैनी या चैन की नींद न आना।

इसे चिंता या खराब नींद की आदतें समझा जाता है, लेकिन यह महिलाओं में छिपे हुए silent myocardial infarction का संकेत हो सकता है।


महिलाओं में जोखिम और कारण

महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक के लक्षण अक्सर लंबे समय तक बने रहने वाले जोखिम कारकों और छिपे हुए कारणों, जैसे हार्मोन, मेटाबॉलिज़्म और लाइफस्टाइल की वजह से होते हैं। कई बार ये कारण अनदेखे रह जाते हैं क्योंकि इनके लक्षण सामान्य हार्ट अटैक जैसे नहीं दिखते, हल्के लगते हैं या उन्हें गैस, थकान या तनाव समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। 

महिलाओं में प्लाक जमना, धमनियों में रुकावट और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल हार्ट की समस्याओं का कारण बन सकते हैं। लेकिन कई बार महिलाओं को सीने में दर्द नहीं होता, बल्कि लगातार थकान, जबड़े में दर्द, अपच, पीठ में दर्द या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी महसूस होती है। यह इसलिए होता है क्योंकि धीरे-धीरे दिल तक जाने वाली नसें संकरी होती जाती हैं। 

  • महिलाओं से जुड़े विशेष ट्रिगर: PCOS, गर्भावस्था के दौरान शुगर या हाई ब्लड प्रेशर, और मेनोपॉज़ जैसे हार्मोनल बदलाव महिलाओं में हार्ट समस्याओं का खतरा बढ़ा देते हैं। इनके कारण अक्सर सामान्य सीने के दर्द की बजाय चक्कर आना, शरीर के ऊपरी हिस्से में दर्द, तेज थकान, अत्यधिक पसीना, गर्दन या कंधे में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
  • लाइफस्टाइल कारण: धूम्रपान, जंक फूड, शारीरिक गतिविधि की कमी और लगातार तनाव महिलाओं के दिल पर सीधा असर डालते हैं। इस कारण हार्ट अटैक के लक्षण indigestion, उलझन, सांस लेने में दिक्कत या ऊपरी पीठ में दर्द जैसे आम समस्याओं की तरह महसूस हो सकते हैं और आसानी से नजरअंदाज हो जाते हैं।
  • इलाज न होने पर होने वाली परेशानियां: हार्ट अटैक के शुरुआती संकेतों को अनदेखा करना गंभीर समस्याओं जैसे दिल का बढ़ना, अनियमित धड़कन और अचानक हार्ट फेल होने तक ले जा सकता है। खासकर महिलाओं में चक्कर, पसीना, सीने में जलन जैसे लक्षण खतरे की शुरुआत हो सकते हैं। 
  • लगातार तनाव और खराब नींद ब्लड प्रेशर बढ़ाकर, शरीर में सूजन पैदा करके, धड़कन को अस्थिर करके और धमनियों को नुकसान पहुंचाकर हार्ट अटैक के खतरे को कई गुना बढ़ा देते हैं, जिससे शुरुआती संकेत समझना मुश्किल हो जाता है। 
  • महिलाओं के लिए ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर को कंट्रोल में रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं जैसे Rosuvastatin, Telmisartan या डायबिटीज की दवाओं का नियमित सेवन दिल को भविष्य की गंभीर समस्याओं से बचा सकता है।

महिलाओं के लिए रोकथाम की रणनीतियाँ

महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक (Silent Heart Attack in women) पहचानना मुश्किल होता है। कई बार महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण बिना सीने के दर्द के भी होते हैं। महिलाएं अक्सर अपच, जबड़े में दर्द या पीठ के दर्द को गंभीर बीमारी न समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। 

इन संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है। जैसे सांस फूलना, चक्कर आना, लगातार थकान, अधिक पसीना और मतली हार्ट अटैक के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। CoQ10, ओमेगा 3 और कुछ जरूरी विटामिन्स जैसे सप्लीमेंट्स, साथ ही कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने वाली दवाएं, महिलाओं में हार्ट जोखिम को कम कर सकती हैं।  

Zeelab Pharmacy के हार्ट सप्लीमेंट्स का नियमित उपयोग, खासकर डायबिटीज या अन्य जोखिम वाले लोगों के लिए, दिल की सुरक्षा के लिए एक आसान और फायदेमंद कदम साबित हो सकता है।

दिल को स्वस्थ रखने वाली जीवनशैली

हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए सही जीवनशैली अपनाना जरूरी है। इससे महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक और असामान्य हार्ट लक्षणों की संभावना काफी कम होती है। अपने भोजन में नट्स, ओमेगा 3 फैटी एसिड, फल और फाइबर शामिल करें, जिससे सूजन कम हो और कोलेस्ट्रॉल संतुलित रहे।  

रोज तेज चाल से चलना और हल्का व्यायाम करने से ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है, ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और दिल मजबूत बनता है। तनाव को कम करने के लिए योग, गहरी साँसें और पर्याप्त नींद बेहद जरूरी हैं, क्योंकि हार्मोनल असंतुलन भी दिल के लक्षणों को बढ़ा सकता है।  

इन आदतों को अपनाने से महिलाएं हार्ट से जुड़ी शुरुआती समस्याओं को समय रहते पहचान सकती हैं।

मेडिकल मॉनिटरिंग और नियमित चेकअप

महिलाओं के दिल को स्वस्थ रखने के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच कराना आवश्यक है। यदि डायबिटीज है या ब्लड प्रेशर बढ़ा रहता है तो शुगर, कोलेस्ट्रॉल और BP समय-समय पर जरूर चेक करवाएं।  

उच्च जोखिम वाली महिलाओं को डॉक्टर Telmisartan जैसी ब्लड प्रेशर की दवा, या Rosuvastatin जैसी कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा दे सकते हैं। डायबिटीज वाली महिलाओं में empagliflozin जैसी दवा हार्ट जोखिम को कम कर सकती है।  

हार्ट सप्लीमेंट्स के साथ नियमित चेकअप आपके दिल और रक्त वाहिकाओं को सुरक्षित रखते हैं और हार्ट अटैक के संकेत समय रहते पहचानने में मदद करते हैं।

महिलाओं के दिल की सेहत के लिए Zeelab Pharmacy के बेहतरीन सप्लीमेंट्स 

अगर भारत में युवा महिलाएं इन लक्षणों को समझ लें, तो वे समय रहते कदम उठा सकती हैं। Zeelab Pharmacy WHO/GMP प्रमाणित, किफायती दामों में दवाएं और सप्लीमेंट्स उपलब्ध कराता है और 1800 से अधिक शहरों में डिलीवरी करता है, जिससे सही उपचार अब हर किसी के लिए आसान हो चुका है। 

Cozy Q 100 Capsule

Cozy Q 100 Capsule में Coenzyme Q10 (CoQ10) होता है, जो शरीर की हर कोशिका में पाया जाने वाला एक जरूरी पोषक तत्व है। यह शरीर में ऊर्जा बनाने में मदद करता है और एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है।  

  • संयोजन: Coenzyme Q10 (100 mg)
  • फायदा: यह सांस लेने में मदद करता है, खांसी और गले की खराश में राहत देता है और फेफड़ों को मजबूत बनाता है।
  • कैसे लें: भोजन के बाद दिन में दो बार एक कैप्सूल लें या डॉक्टर के निर्देश अनुसार। 

Cozy Q 300 Capsule

Cozy Q 300 Capsule में Coenzyme Q10 (300 mg) होता है, जो शरीर की कोशिकाओं में ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में मदद करता है।  

  • संयोजन: Coenzyme Q10 (300 mg)
  • फायदा: यह सांस लेने में आसानी करता है, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है और खांसी, जुकाम से राहत दिलाता है।
  • कैसे लें: भोजन के बाद दिन में 2 बार एक कैप्सूल लें या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार।

Cozy Q Ultra Capsule

Cozy Q Ultra Capsule एक हार्ट हेल्थ सपोर्ट सप्लीमेंट है, जिसमें एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन, मिनरल्स, अमीनो एसिड और ओमेगा-3 फैटी एसिड शामिल हैं। यह दिल की सेहत, ऊर्जा, इम्युनिटी और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। 

  • संयोजन: Coenzyme Q (300 mg) + L-Carnitine (50 mg) + Lycopene (5 mg) + L-Arginine (100 mg) + Selenium (0.04 mg) + Vitamin E (10 mg) + Zinc (17 mg) + EPA (90 mg) + DHA (60 mg) + Vitamin C (80 mg)
  • फायदा: यह दिल को मजबूत बनाता है, ऊर्जा बढ़ाता है और खून के बहाव को बेहतर करता है, जिससे दिल को सुरक्षा मिलती है।
  • कैसे लें: रोजाना एक कैप्सूल भोजन के बाद लें या डॉक्टर की सलाह अनुसार। 

Cozy 10 Capsule

Cozy 10 Capsule में CoEnzyme Q10, Omega-3 Fatty Acids, Vitamin A, E और B-Complex सम्मिलित हैं, जो ऊर्जा बढ़ाने, दिल को मजबूत बनाने और शरीर को ऑक्सीडेटिव नुकसान से बचाने में सहायक हैं। 

  • संयोजन: Co-enzyme Q10 (15 mg) + Omega-3 (100 mg) + Vitamin A (2000 IU) + Vitamin E (7.5 IU) + Vitamin B1 (1.6 mg) + Vitamin B2 (1.6 mg) + Vitamin B6 (0.75 mg) + Vitamin B12 (0.001 mg) + Niacinamide (16 mg) + Selenium (0.15 mg)
  • फायदा: लगातार थकान दूर करता है, दिल की क्षमता बढ़ाता है और शरीर को संतुलित पोषण प्रदान करता है।
  • कैसे लें: रोजाना भोजन के बाद एक कैप्सूल पानी के साथ लें। 

Zeelab Omega 3 Fish Oil Capsules

Zeelab Omega 3 Fish Oil Capsule में DHA और EPA जैसे आवश्यक फैटी एसिड होते हैं, जो हार्ट और ब्रेन हेल्थ को बेहतर बनाते हैं, कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करते हैं और समग्र स्वास्थ्य को समर्थन देते हैं। 

  • संयोजन: Omega-3 Fatty Acids (1000mg)
  • फायदा: यह दिल को स्वस्थ रखता है, सूजन कम करता है और कोलेस्ट्रॉल को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करता है।
  • कैसे लें: भोजन के बाद रोजाना एक सॉफ्टजेल पानी के साथ लें। 

ZEELAB Ashwagandha Immunity and Stamina Booster Capsules

ZEELAB Ashwagandha Capsule एक शक्तिशाली सप्लीमेंट है जो आपकी इम्युनिटी और स्टैमिना बढ़ाने में मदद करता है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाली अश्वगंधा होती है, जो अपने कई स्वास्थ्य लाभों के लिए जानी जाने वाली प्राकृतिक जड़ी-बूटी है।  

  • Composition: Ashwagandha (Withania Somnifera) 500mg
  • What it does: इम्युनिटी बढ़ाने, तनाव कम करने, स्टैमिना बढ़ाने, ऊर्जा में सुधार करने और शरीर की संपूर्ण ताकत को प्राकृतिक रूप से सपोर्ट करने में मदद करता है।
  • How to take: रोजाना भोजन के बाद एक कैप्सूल पानी के साथ लें या अपने हेल्थकेयर प्रोफेशनल की सलाह के अनुसार सेवन करें। 

Herystatin Capsule

Herystatin Capsule एक प्रभावी हर्बल फॉर्म्युलेशन है, जिसे संपूर्ण स्वास्थ्य और वेलनेस को सपोर्ट करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें अर्जुन, चित्रक, पुनर्नवा और शुद्ध गुग्गुल जैसी कई ताकतवर प्राकृतिक सामग्री शामिल हैं।  

  • Composition: Arjun (60 mg) + Chitrak (20 mg) + Punarnava (30 mg) + Kutki (20 mg) + Sonth (50 mg) + Vacha (20 mg) + Motha (20 mg) + Rason (40 mg) + Pipli (30 mg) + Khadir (20 mg) + Darusita (30 mg) + Mirch (30 mg) + Sudh Hingu (20 mg) + Shudh Shilajit (30 mg) + Shuddha Guggul (80 mg)
  • What it does: नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल को स्वस्थ स्तर पर बनाए रखने में मदद करता है, एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) को कम करता है और दिल के समग्र कार्य में सुधार करता है।
  • How to take: भोजन के बाद रोजाना एक कैप्सूल पानी के साथ लें या अपने डॉक्टर द्वारा बताए गए डोज के अनुसार लें। 

Vitazem 5G Softgel Capsule with Omega-3 Fatty Acid and Antioxidants

Vitazem 5G Softgel Capsule एक शक्तिशाली सप्लीमेंट है, जिसे समग्र स्वास्थ्य और वेल-बeing को सपोर्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड (EPA और DHA), कई विटामिन, मिनरल्स और हर्बल एक्सट्रैक्ट जैसे ग्रीन टी एक्सट्रैक्ट, जिनसेंग, गिंको बिलोबा और ग्लूटाथायोन शामिल हैं।  

  • Composition: Omega-3 Fatty Acids (EPA 90 mg + DHA 60 mg) + Green Tea Extract (10 mg) + Ginseng (42.50 mg) + Ginkgo Biloba Extract (10 mg) + Grape Seed Extract (15 mg) + Glutathione (10 mg) + Lactic Acid Bacillus (500 Lacs Spores) + Citrus Bioflavonoids (20 mg) + Natural Mixed Carotenoids (11.33 mg, 10%) + Vitamin D3 (200 IU) + Wheat Germ Oil (25 mg) + Vitamin K1 (10 mcg) + Vitamin B6 (1 mg) + Vitamin B12 (1 mcg) + Thiamine (1.4 mg) + Niacinamide (18 mg) + Ascorbic Acid (40 mcg) + Folic Acid (120 mcg + 30 mcg) + Choline Hydrogen Tartrate (25 mg) + Lutein (250 mcg, 10%) + Piperine (5 mg) + Calcium (20 mg) + Phosphorous (15.45 mg) + Iron (10 mg) + Zinc (12 mg) + Iodine (120 mcg) + Magnesium (30 mg) + Manganese (1.5 mg) + Copper (0.5 mg) + Chromium (50 mcg) + Molybdenum (25 mcg) + Selenium (20 mcg) + Potassium (4 mg) + Chloride (3.6 mg) 
  • What it does: ओमेगा-3 फैटी एसिड और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट प्रोटेक्शन के जरिए दिल, दिमाग, आंखों और जोड़ों की सेहत को सपोर्ट करता है।
  • How to use: भोजन के बाद रोजाना एक सॉफ्टजेल पानी के साथ लें या अपने हेल्थ केयर प्रोफेशनल की सलाह के अनुसार सेवन करें। 

E Vitazem Plus Capsule

E Vitazem Plus एक WHO-GMP प्रमाणित सॉफ्ट जेल कैप्सूल है, जो न्यूट्रिशनल डेफिशिएंसी को पूरा कर समग्र स्वास्थ्य को सपोर्ट करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें नेचुरल विटामिन E, ओमेगा-3 फैटी एसिड और व्हीट जर्‍म ऑयल का शक्तिशाली संयोजन होता है, जो मिलकर शरीर की जरूरी क्रियाओं को बेहतर बनाने में मदद करता है।  

  • Composition: Vitamin E (10mg) + Wheat Germ Oil (100mg) + Omega-3 (300mg)
  • What it does: मजबूत एंटीऑक्सीडेंट सपोर्ट देता है, त्वचा की सेहत को बढ़ावा देता है, इम्युनिटी में सुधार करता है और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को प्रभावी ढंग से कम करने में मदद करता है।
  • How to use: रोजाना भोजन के बाद एक कैप्सूल लें या अपने हेल्थकेयर प्रोफेशनल की सलाह के अनुसार सेवन करें। 

Omega 369 Capsule

Omega 369 Capsules एक हाई-क्वालिटी सप्लीमेंट है, जिसमें आवश्यक फैटी एसिड – ओमेगा 3, 6 और 9 शामिल हैं, जो समग्र स्वास्थ्य को सपोर्ट करते हैं। ये कैप्सूल हार्ट हेल्थ को बनाए रखने, दिमागी कार्यक्षमता को सपोर्ट करने, सूजन कम करने और त्वचा व जोड़ों की सेहत को बेहतर करने में मदद करते हैं। 

  • Composition: Omega 3 (500 mg) + Omega 6 (136 mg) + Omega 9 (200 mg)
  • What it does: दिल, दिमाग, जोड़ों और त्वचा की सेहत को सपोर्ट करता है और रोजाना जरूरी फैटी एसिड की पूर्ति में मदद करता है।
  • How to use: रोजाना भोजन के बाद एक कैप्सूल लें या अपने हेल्थ केयर प्रोफेशनल की सलाह के अनुसार सेवन करें। 

Zeelab Krill Oil Capsule

Zeelab Krill Oil Capsules एक हेल्थ सप्लीमेंट है, जिसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में होते हैं, जो दिल, दिमाग और जोड़ों की सेहत के लिए जरूरी हैं। सामान्य फिश ऑयल से अलग, क्रिल ऑयल छोटे समुद्री क्रस्टेशियंस से प्राप्त होता है और इसमें मौजूद एस्टैक्सैंथिन की वजह से यह आसानी से अवशोषित होता है और अतिरिक्त एंटीऑक्सीडेंट लाभ प्रदान करता है। 

  • Composition: Krill Oil (1000 mg) + Omega-3 Fatty Acids (200 mg) + EPA (120 mg) + DHA (80 mg) + Phospholipids (200 mg) + Astaxanthin (200 mcg)
  • What it does: बेहतर अवशोषित होने वाले ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट सपोर्ट के जरिए दिल, दिमाग और जोड़ों की सेहत को सपोर्ट करता है।
  • How to use: रोजाना भोजन के बाद एक कैप्सूल पानी के साथ लें या अपने हेल्थ केयर प्रोफेशनल की सलाह के अनुसार सेवन करें। 

Lycosuch Plus Capsule

Lycosuch Plus Capsule एक न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट है, जिसमें Lycopene 5000 mcg और एंटीऑक्सीडेंट्स शामिल हैं। यह पोषण की कमी को पूरा करने, समग्र स्वास्थ्य को सपोर्ट करने और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से शरीर की रक्षा करने के लिए उपयोग किया जाता है। 

  • Composition: Lycopene (5000mcg)
  • What it does: पाचन को बेहतर बनाने, एसिडिटी कम करने और हर्बल तत्वों की मदद से लिवर फंक्शन को सपोर्ट कर संपूर्ण पाचन तंत्र की सेहत में सुधार करने में मदद करता है।
  • How to use: भोजन के बाद दिन में दो बार एक कैप्सूल लें या अपने हेल्थ केयर प्रोफेशनल की सलाह के अनुसार सेवन करें। 

तुरंत मदद कब लें

महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक कैसा महसूस होता है, इसे समझना बहुत जरूरी है क्योंकि इसके लक्षण अक्सर हल्के, मिले-जुले और आसानी से नजरअंदाज किए जा सकते हैं। अगर दो या तीन असामान्य लक्षण एक साथ दिखें, तो तुरंत मेडिकल मदद लेना जरूरी है। 

अचानक बहुत ज्यादा थकान महसूस होना, सांस फूलना, चक्कर आना, पेट खराब लगना, मतली, जबड़े में दर्द, गर्दन में दर्द या ऊपरी पीठ में जकड़न जैसे लक्षण दिख सकते हैं। अगर ये लक्षण पाँच मिनट से ज्यादा समय तक बने रहें, तो यह सोचकर बैठना सही नहीं कि ये सिर्फ गैस, तनाव या कमजोरी की वजह से हैं। 

अगर आपको लगे कि हार्ट अटैक हो सकता है, तो तुरंत मदद के लिए कॉल करें। खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल न जाएं, क्योंकि हालत जल्दी बिगड़ सकती है। अगर शरीर में कुछ अलग, भारी या असामान्य महसूस हो रहा है, तो अपनी भावना पर भरोसा करें और तुरंत चेकअप करवाएं। 

कई महिलाएं बताती हैं कि साइलेंट हार्ट अटैक के दौरान उन्हें सीने में तेज दर्द नहीं, बल्कि अजीब सा दबाव, बेवजह बहुत ज्यादा थकान, बेचैनी या शरीर के ऊपरी हिस्से में जकड़न जैसा महसूस होता है। समय पर इलाज मिलने से अनियमित धड़कन, हार्ट फेल्योर या अचानक दिल रुक जाने जैसी गंभीर स्थितियों को रोका जा सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

साइलेंट लक्षणों का मतलब यह नहीं होता कि सब कुछ ठीक है—कई बार यह शरीर का तरीका होता है आपको यह बताने का कि सावधान हो जाएं। हार्ट से जुड़ी कई समस्याएँ शुरू में बहुत हल्की लगती हैं और हम उन्हें थकान, गैस या तनाव समझकर टाल देते हैं। लेकिन इन्हें शुरुआत में पहचानना और रोकथाम करना बेहद जरूरी है। 

अपने शरीर के छोटे-छोटे संकेतों पर ध्यान देना, नियमित हेल्थ चेकअप कराना और प्रिवेंशन के कदम उठाना आपके दिल को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं। छोटी-मोटी परेशानियों या दर्द को भी हल्के में न लें, क्योंकि बीमारी को रोकना हमेशा इलाज करने से आसान होता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक के क्या लक्षण होते हैं?
A. महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक (Silent Heart Attack) के संकेत कई बार इतने हल्के होते हैं कि उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। सीने में हल्का दबाव या कसाव, सांस फूलना, बिना वजह बहुत ज्यादा थकान, पेट से जुड़ी दिक्कतें जैसे अपच, चक्कर आना या पीठ, गर्दन या जबड़े में दर्द महसूस हो सकता है। ये लक्षण आकर चले भी जाते हैं, इसलिए इन्हें अक्सर सिर्फ तनाव या कमजोरी समझ लिया जाता है। इन शुरुआती संकेतों को पहचानने से समय पर हार्ट की जांच और इलाज संभव हो पाता है।

Q. क्या महिलाओं में बिना सीने के दर्द के भी हार्ट अटैक हो सकता है?
A. हाँ, कई महिलाओं को हार्ट अटैक के दौरान क्लासिक तेज सीने के दर्द का अनुभव नहीं होता। इसकी जगह उन्हें सांस फूलना, अचानक थकान, मतली, ऊपरी पीठ में जकड़न, बेचैनी जैसा महसूस होना, जबड़े में दर्द या भीतर से घबराहट जैसा अनुभव हो सकता है। क्योंकि ये लक्षण सीधे दिल से जुड़े नहीं लगते, महिलाएं अक्सर अस्पताल जाने में देरी कर देती हैं। यही वजह है कि जागरूकता और समझ बहुत जरूरी है, ताकि समय रहते इलाज शुरू हो सके।

Q. क्या थकान भी महिलाओं में हार्ट अटैक का लक्षण हो सकता है?
A. हाँ, अचानक बहुत ज्यादा थकान महसूस होना या रोजमर्रा के हल्के काम करते हुए भी असामान्य रूप से थक जाना, महिलाओं में हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है। यह सामान्य थकान से अलग होता है, जो नींद पूरी न होने या ज्यादा काम से महसूस होती है। अगर आपको लंबे समय से लगातार थकान के साथ-साथ सांस फूलना, सीने, पीठ या जबड़े में दर्द भी महसूस हो रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

Q. क्या जबड़े में दर्द होना महिलाओं में हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है?
A. हाँ, खासकर तब जब जबड़े में दर्द अचानक शुरू हो, दबाव जैसा लगे, जकड़न महसूस हो या दर्द गर्दन और सीने से फैलता हुआ लगे। कई बार यह तेज चुभने वाले दर्द की बजाय हल्के लेकिन लगातार दबाव या भारीपन जैसा होता है। अगर जबड़े का दर्द चलने-फिरने या सीढ़ियाँ चढ़ने पर बढ़ जाए, और साथ में पसीना, सांस फूलना या पेट में तकलीफ महसूस हो, तो यह दिल से जुड़ा संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

Q. साइलेंट हार्ट अटैक और गैस/अपच में क्या फर्क है?
A. आमतौर पर अपच या गैस खाना खाने के बाद महसूस होती है और एंटासिड लेने से राहत मिल जाती है। साइलेंट हार्ट अटैक में सीने में कसाव, ऊपर के पेट में दबाव, सांस लेने में तकलीफ, मतली या भारीपन महसूस हो सकता है, जो जरूरी नहीं कि खाने से जुड़ा हो। हार्ट की समस्या में तकलीफ चलने, सीढ़ियाँ चढ़ने या मेहनत वाले काम करने पर बढ़ सकती है और आराम करने पर कुछ कम हो सकती है, जबकि गैस आमतौर पर इस तरह एक्टिविटी से नहीं बदलती। अगर साथ में पसीना, चक्कर, या दर्द पीठ या जबड़े तक फैल रहा हो, तो इसे गंभीरता से लेकर तुरंत जांच करवानी चाहिए।

Q. महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक ज्यादा क्यों होते हैं?
A. महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक ज़्यादा देखे जाते हैं क्योंकि उनके लक्षण अक्सर सामान्य नहीं होते और हार्मोन, छोटी धमनियाँ, डायबिटीज, थायरॉइड, तनाव और हाई BP जैसी स्थितियाँ लक्षणों को छिपा देती हैं। कई महिलाएँ सीने के दर्द के बिना ही सिर्फ थकान, गैस, जलन या चिंता जैसा महसूस करती हैं, जिससे वे इन्हें हार्ट की समस्या नहीं समझतीं और इलाज में देर हो जाती है। इसी वजह से जागरूकता और नियमित चेकअप बहुत जरूरी हैं।

Q. कौन से रिस्क फैक्टर महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाते हैं?
A. कुछ मुख्य जोखिम कारक हैं– डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, ज्यादा वजन, PCOS, मेनोपॉज़ के दौरान हार्मोनल बदलाव, लगातार तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी, परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास और ऑटोइम्यून या इंफ्लेमेटरी बीमारियाँ जैसे रुमेटॉइड आर्थराइटिस आदि। अगर आपके पास इनमें से कोई भी रिस्क फैक्टर है, तो हार्ट हेल्थ पर ध्यान देना, समय-समय पर जांच कराना और छोटे-छोटे संकेतों को भी गंभीरता से लेना जरूरी है।

Q. क्या साइलेंट हार्ट अटैक से लंबे समय तक नुकसान हो सकता है?
A. हाँ, साइलेंट हार्ट अटैक लंबे समय में दिल को काफी नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि अक्सर महिलाओं को पता ही नहीं चलता कि उन्हें हार्ट अटैक हुआ है। देर से पहचान होने पर दिल की मांसपेशी को ज्यादा नुकसान होता है, जिससे दिल कमजोर हो सकता है, आगे चलकर फिर से हार्ट अटैक, अनियमित धड़कन या हार्ट फेल्योर का खतरा बढ़ जाता है। ECG, स्ट्रेस टेस्ट और नियमित हार्ट चेकअप के जरिए समय रहते पता लगाना बहुत जरूरी है, ताकि भविष्य की जटिलताओं को कम किया जा सके।

Q. महिलाओं को कब इमरजेंसी मदद लेनी चाहिए अगर हार्ट से जुड़े लक्षण लगें?
A. अगर किसी महिला को अचानक सांस लेने में दिक्कत हो, बिना वजह बहुत ज्यादा थकान महसूस हो, पेट में तेज तकलीफ या जलन हो, अचानक पसीना आने लगे, चक्कर आए, ऊपर की पीठ में जकड़न या जबड़े में दर्द हो, तो तुरंत मेडिकल हेल्प लेना चाहिए। खास तौर पर तब, जब ये लक्षण अचानक शुरू हों या कुछ मिनटों से ज्यादा समय तक बने रहें, या चलने-फिरने पर और बढ़ जाएँ। ऐसी स्थिति दिल से जुड़ी आपातकालीन समस्या का संकेत हो सकती है। जल्दी अस्पताल पहुँचने से गंभीर नुकसान रोका जा सकता है और रिकवरी की संभावना बढ़ जाती है।

Q. महिलाएं साइलेंट हार्ट अटैक से खुद को कैसे बचा सकती हैं?
A. साइलेंट हार्ट अटैक से बचने के लिए सबसे पहले नियमित हार्ट चेकअप कराते रहें और अपने कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें। रोजाना थोड़ा बहुत एक्सरसाइज करें, तनाव को मैनेज करें, हेल्दी डाइट लें, धूम्रपान से बचें और शराब का सेवन हो तो बहुत सीमित रखें। अच्छी नींद लें और परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास हो तो डॉक्टर से समय-समय पर सलाह लेते रहें। महिलाएँ अगर लगातार थकान, सांस फूलना, पीठ, गर्दन या जबड़े में बार-बार होने वाले दर्द जैसे लक्षणों को गंभीरता से लें और देर न करें, तो साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।


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