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त्रिकटु चूर्ण (Trikatu Churna): लाभ, उपयोग, सामग्री और खुराक

Trikatu Churna: Benefits, Uses, Ingredients & Dosage Trikatu Churna: Benefits, Uses, Ingredients & Dosage
Published On : 14 Jul, 2025 | Written By : Mr. Deepak Saini | Reviewed By : Dr. Anubhav Singh

त्रिकटु चूर्ण एक पारंपरिक आयुर्वेदिक योग है, जो तीन प्रभावशाली जड़ी-बूटियों — सोंठ (सूखी अदरक), मरिच (काली मिर्च) और पिप्पली (लंबी मिर्च) से बनाया जाता है। “त्रिकटु” का अर्थ होता है “तीन तीखे तत्व”, जो इसकी गर्म, तीक्ष्ण प्रकृति को दर्शाता है। यह गुण पाचन अग्नि (Agni) को प्रज्वलित करता है और शरीर में जमे विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। आयुर्वेद में त्रिकटु को मेटाबॉलिज्म बढ़ाने, पाचन सुधारने और शरीर को शुद्ध करने की क्षमता के लिए अत्यधिक सम्मानित किया गया है। यह कप – वात दोष को संतुलित करता है और कई अन्य हर्बल औषधियों के साथ मिलकर उनकी प्रभावशीलता बढ़ाने में सहायक होता है। शरीर को गरमाहट देकर, कफ को तोड़कर और पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाकर त्रिकटु चूर्ण प्रतिरक्षा, श्वसन स्वास्थ्य और संपूर्ण पाचन प्रणाली को मजबूती देता है।

त्रिकटु चूर्ण के मुख्य घटक:

त्रिकटु तीन समय-परखी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से मिलकर बना होता है, जिनमें अनेक चिकित्सीय गुण होते हैं:

  • सोंठ: पाचन को उत्तेजित करने वाला, सूजन कम करने वाला और गैस दूर करने वाला गुण। अपच, मतली, पेट फूलना और जोड़ों के दर्द में उपयोगी।
  • मरिच (काली मिर्च): मेटाबॉलिज्म को बढ़ाती है, शरीर से विषाक्त पदार्थ निकालने में मदद करती है और पिपेरिन के कारण पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाती है।
  • पिप्पली (लंबी मिर्च): शक्तिशाली रसायन और कफहर। यह श्वसन मार्ग को साफ करती है और पुराने खांसी व कफ जमाव में लाभकारी होती है।

ये सभी घटक मिलकर पाचन एवं श्वसन तंत्र को शुद्ध, गर्म और मजबूत बनाते हैं।

आयुर्वेद में त्रिकटु का महत्व:

आयुर्वेद में त्रिकटु चूर्ण को एक स्वतंत्र औषधि के रूप में ही नहीं, बल्कि एक योगवाही (अन्य औषधियों की शक्ति बढ़ाने वाला माध्यम) के रूप में भी विशेष स्थान प्राप्त है। इसमें मौजूद दीपनीय (भूख बढ़ाने वाले) और पाचन (अन्न को पचाने वाले) गुण मन्दाग्नि, गैस, पेट फूलना और भूख न लगने की स्थिति में अत्यंत लाभकारी हैं। यह आम (अधपचा भोजन जो शरीर में विष की तरह काम करता है) को दूर कर शरीर को शुद्ध करता है। पंचकर्म सहित विभिन्न डिटॉक्स उपचारों में भी त्रिकटु को औषधियों की जैवउपलब्धता बढ़ाने और शरीर के सूक्ष्म मार्गों (स्रोतो) को खोलने के लिए प्रयोग किया जाता है।

त्रिकटु चूर्ण के लाभ:

  • अपच और गैस के लिए त्रिकटु: त्रिकटु एक प्राकृतिक पाचक टॉनिक है जो पाचक एंजाइम और पित्त के स्राव को बढ़ाता है। इससे भोजन का टूटना और अवशोषण बेहतर होता है, जिससे पेट फूलना, अम्लता, गैस और भोजन बाद भारीपन जैसी समस्याएं कम होती हैं। नियमित सेवन से आंतों का स्वास्थ्य सुधरता है।
  • वजन प्रबंधन के लिए त्रिकटु: यह मेटाबॉलिज्म को बढ़ाकर शरीर में जमा चर्बी को कम करने में सहायता करता है। इसकी गर्म प्रकृति कैलोरी बर्न बढ़ाती है और अतिरिक्त कफ से होने वाली सुस्ती को घटाती है। इसलिए इसे आयुर्वेदिक वजन-नियंत्रण योजनाओं में शामिल किया जाता है।
  • श्वसन स्वास्थ्य के लिए त्रिकटु: त्रिकटु एक उत्कृष्ट कफ-पित्तहर और डिकंजेस्टेंट है। यह बलगम साफ करता है, साइनस में दबाव कम करता है और जुकाम, खांसी व ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं में राहत देता है। दमा और पुराने श्वसन अवरोध में भी उपयोगी माना जाता है।
  • कमज़ोर प्रतिरक्षा के लिए त्रिकटु: इसकी शुद्धिकारी और गर्म प्रकृति शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में सहायता करती है और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती है। ठंड के मौसम में संक्रमण से बचाव में सहायक है।
  • डिटॉक्स (आम पाचन) के लिए त्रिकटु: आयुर्वेद में आम को अनेक रोगों की जड़ माना गया है। त्रिकटु की तीक्ष्ण और गर्म प्रकृति आम को सुखाकर और पचाकर शरीर से बाहर निकालती है। यह स्रोतो को साफ कर यकृत (लिवर) को भी मजबूती देता है।
  • भूख न लगने पर त्रिकटु: मन्दाग्नि के कारण भूख कम लगती है। त्रिकटु अग्नि को पुनः प्रज्वलित कर भूख और पाचन शक्ति दोनों को बढ़ाता है, विशेषकर बीमारी से उबर रहे लोगों के लिए उपयोगी।
  • जोड़ों के दर्द व सूजन में त्रिकटु: इसकी गर्म और सूजन-रोधी प्रकृति जोड़ों की जकड़न, सूजन और दर्द को कम करने में मदद करती है। यह रक्त प्रवाह को बेहतर करता है और जोड़ों में जमे विषाक्त पदार्थों को हटाता है।
  • औषध अवशोषण बढ़ाने में त्रिकटु: काली मिर्च में मौजूद पिपेरिन विभिन्न पोषक तत्वों और दवाओं की जैवउपलब्धता बढ़ाता है। इसलिए त्रिकटु को अनेक हर्बल औषधियों के साथ मिलाकर दिया जाता है।

त्रिकटु चूर्ण कैसे उपयोग करें?

Form Dosage Method
Powder (Churna) ½ से 1 चम्मच दिन में दो बार गुनगुने पानी, शहद या घी के साथ (आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह अनुसार)

सामान्य उपयोग विधियाँ:

  • खांसी में राहत के लिए शहद के साथ
  • पाचन सुधारने के लिए गुनगुने पानी के साथ
  • भोजन से पहले घी के साथ मेटाबॉलिज्म बढ़ाने हेतु
  • अन्य जड़ी-बूटियों के साथ उनका अवशोषण बढ़ाने के लिए

त्रिकटु चूर्ण कब लें?

  • भारी या तली-भुनी चीजें खाने के बाद पेट फूलने पर
  • ठंड के मौसम में कफ जमने से बचाव हेतु
  • डिटॉक्स या उपवास के दौरान
  • जब भूख कम लगे या मेटाबॉलिज्म धीमा हो
  • लंबे समय तक पाचन और प्रतिरक्षा सुधारने के लिए (वैद्य की सलाह से)

त्रिकटु कैसे काम करता है?

त्रिकटु चूर्ण पाचन अग्नि (Agni) को प्रज्वलित करता है, जो आयुर्वेदिक उपचार का मूल आधार है। इसकी गर्म, तीक्ष्ण और पैठने वाली प्रकृति भोजन और विषाक्त पदार्थों को तोड़ती है, श्वसन मार्ग से कफ हटाती है और मल त्याग को सुचारु बनाती है। इसमें मौजूद पिपेरिन और जिंजरॉल एंजाइमों के स्राव को बढ़ाते हैं, सूजन कम करते हैं और यकृत क्रिया को मजबूत बनाते हैं। यह शरीर में ऊर्जा, स्पष्टता और संतुलन लाने का समग्र कार्य करता है।

कौन लोग त्रिकटु का उपयोग करें?

  • जिन्हें पाचन कमजोर, गैस या पेट फूलने की समस्या हो
  • जो बार-बार जुकाम, कफ या दमा से ग्रस्त हों
  • कमज़ोर प्रतिरक्षा या बार-बार संक्रमण वाले व्यक्ति
  • जो वजन-नियंत्रण या डिटॉक्स प्रक्रिया पर हों
  • जो अन्य हर्बल औषधियों का सेवन कर रहे हों

सुरक्षा संबंधी सावधानियाँ:

  • उच्च पित्त या अम्लता, अल्सर जैसी गर्मी-सम्बंधित समस्याओं में उपयुक्त नहीं
  • गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान बिना सलाह के उपयोग न करें
  • यदि दवाएं ले रहे हैं तो चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें
  • कम मात्रा से शुरू करें और सहनशीलता परखें
  • हवादार, ठंडी और सूखी जगह पर वायुरुद्ध डिब्बे में रखें

निष्कर्ष:

त्रिकटु चूर्ण एक प्रभावशाली आयुर्वेदिक योग है जो पाचन को संतुलित करता है, शरीर को डिटॉक्स करता है और प्रतिरक्षा को मजबूत बनाता है। केवल तीन जड़ी-बूटियों के संयोजन से यह वजन-प्रबंधन, मेटाबॉलिज्म सुधार, फेफड़ों की सफाई और पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाने तक कई तरह के लाभ प्रदान करता है। सही दिशा-निर्देशों में और उचित मात्रा में उपयोग करने पर त्रिकटु शरीर और मन दोनों में संतुलन व ऊर्जा प्रदान करने वाला उत्तम प्राकृतिक उपाय है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):

Q: क्या त्रिकटु रोज़ लिया जा सकता है?
A. हां, लेकिन छोटी मात्रा में और दीर्घकालीन उपयोग के लिए आयुर्वेदिक विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में।

Q: क्या त्रिकटु अम्लता में लाभकारी है?
A. नहीं, त्रिकटु की गर्म प्रकृति अम्लता या एसिड रिफ्लक्स बढ़ा सकती है, इसलिए ऐसी स्थिति में इसका सेवन सावधानी से या विशेषज्ञ की सलाह पर ही करें।

Q: क्या त्रिकटु वजन कम करने में मदद करता है?
A. हां, यह पाचन और मेटाबॉलिज्म को सुधारता है, जिससे वजन-कम करने की प्रक्रिया को अप्रत्यक्ष रूप से सहायता मिलती है।

Q: क्या यह बच्चों के लिए सुरक्षित है?
A. त्रिकटु बच्चों को हमेशा बहुत कम मात्रा में ही देना चाहिए। बिना विशेषज्ञ की सलाह के न दें, क्योंकि उनकी पाचन शक्ति संवेदनशील होती है और गलत मात्रा से असुविधा हो सकती है।

Q: क्या त्रिकटु दूध के साथ लिया जा सकता है?
A. त्रिकटु को शहद, घी या गुनगुने पानी के साथ लेना उचित है। दूध इसके गर्म प्रभाव को कम कर देता है, इसलिए दूध के साथ सेवन नहीं करना चाहिए।

Q: त्रिकटु कब तक नियमित रूप से लिया जा सकता है?
A: सामान्यतः छोटी-छोटी अवधि (4–8 सप्ताह) के लिए लिया जाता है; दीर्घकालिक उपयोग के लिए आयुर्वेदिक वैद्य से परामर्श करें।

Q: त्रिकटु लेने से पहले किसी प्रकार के टेस्ट या जांच की ज़रूरत है?
A: विशेष जांच सामान्यतः आवश्यक नहीं, पर यदि आपको पाचन सम्बन्धी गंभीर समस्या, अल्सर, या किसी दवा का दीर्घकालिक सेवन है तो चिकित्सक से सलाह लेकर संबंधित परीक्षण करवा लें।

Q: क्या त्रिकटु शुगर (डायबिटीज) रोगियों के लिए सुरक्षित है?
A: त्रिकटु आमतौर पर डायबिटीज़ के लिए प्रत्यक्ष रूप से हानिकारक नहीं, पर यह मेटाबॉलिज्म प्रभावित कर सकता है—डायबिटीज़ की दवाइयों के साथ सेवन से पहले डॉक्टर से परामर्श ज़रूरी है।

Q: त्रिकटु लेने के बाद किन दवाओं से सावधानी बरतनी चाहिए?
A: पित्त बढ़ाने वाली दवाओं, एसिडिक दवाओं, और कुछ दमा/श्वसन संबंधी दवाओं के साथ परस्पर क्रिया हो सकती है—कोई भी संयोजन करने से पहले वैद्य या फार्मासिस्ट से सलाह लें।

Q: त्रिकटु के कुछ सामान्य साइड-इफेक्ट क्या हो सकते हैं?
A: अधिक मात्रा में लेने पर मौखिक जलन, गर्मी का अहसास, हल्का एसिडिटी या पेट में जलन हो सकती है। ऐसी स्थिति में सेवन बंद कर चिकित्सक से संपर्क करें।

Q: क्या त्रिकटु को खाली पेट लेना चाहिए या भोजन के बाद?
A: सामान्यत: आधा चम्मच गुनगुने पानी के साथ भोजन के पहले या बाद दोनों तरह से लिया जा सकता है; निम्न पाचन शक्ति वाले लोगों के लिए भोजन के बाद लेना सुरक्षित रहता है।

Q: त्रिकटु के परिणाम दिखने में कितना समय लगता है?
A: व्यक्तिगत स्थिति पर निर्भर करता है—कई लोगों को पाचन में सुधार कुछ दिनों से 2-3 सप्ताह में दिखाई दे सकता है; गंभीर समस्याओं में समय अधिक लग सकता है।

Q: क्या त्रिकटु को बाहर से (टॉपिकल) उपयोग के लिए प्रयोग किया जा सकता है?
A: त्रिकटु मुख्यतः आंतरिक उपयोग के लिए है; बाह्य उपयोग से जलन हो सकती है—टॉपिकल प्रयोग के लिए विशेष तैयारी और वैद्य की सलाह आवश्यक है।

Q: त्रिकटु और अन्य हर्बल चूर्णों को एक साथ लेने में क्या सावधानी है?
A: कई हर्बल मिश्रणों में गर्म पदार्थ होते हैं—एक साथ लेने से अत्यधिक गर्मी/पित्त बढ़ सकती है। संयोजन से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से मार्गदर्शन लें।

Q: क्या त्रिकटु का कोई ओवरडोज़ (अधिक सेवन) प्रभाव होता है?
A: हाँ—बहुत अधिक मात्रा लेने पर जठर में जलन, तेज अम्लता, चिड़चिड़ापन और त्वचा पर असहजता हो सकती है। अगर असुविधा हो तो सेवन बंद कर चिकित्सकीय सलाह लें।


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