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एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) दवाइयों की सूची – सामान्य दवाएँ, उपयोग और सुरक्षा मार्गदर्शिका

Antiplatelet Medication List – Common Drugs, Uses & Safety Guide Antiplatelet Medication List – Common Drugs, Uses & Safety Guide

एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) दवाइयाँ रक्त में थक्के बनने से रोकने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये दवाइयाँ प्लेटलेट्स (रक्त के छोटे कण) को आपस में चिपकने से रोकती हैं, जिससे धमनियों में थक्का बनने का खतरा कम हो जाता है। इन्हें खासतौर पर हृदय संबंधी समस्याओं जैसे दिल का दौरा, मस्तिष्काघात (स्ट्रोक) और परिधीय धमनी रोग में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) दवाइयाँ गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करके हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं। यदि रोगी इनके प्रकार, उपयोग, संभावित दुष्प्रभाव और सावधानियाँ समझ लें, तो इनका सुरक्षित व प्रभावी तरीके से सेवन कर सकते हैं।

एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) क्या होते हैं?

एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) ऐसी दवाइयाँ हैं जो प्लेटलेट्स को एक-दूसरे से जुड़ने की प्रक्रिया को रोकती हैं, जिससे रक्त में थक्के बनने की संभावना कम हो जाती है। यह दवाइयाँ रक्त को पतला करने वाली दवाओं से अलग होती हैं, क्योंकि ये सीधे प्लेटलेट्स के कार्य पर असर डालती हैं। यह खासकर धमनियों में बनने वाले थक्कों को रोकने में उपयोगी होती हैं, जो दिल का दौरा या मस्तिष्काघात का कारण बन सकते हैं।

एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) के उपयोग और फायदे

  • दिल का दौरा और मस्तिष्काघात रोकने में मदद: धमनियों में थक्का बनने के जोखिम को कम करती हैं।
  • हृदय संबंधी रोगों का प्रबंधन: कोरोनरी धमनी रोग और परिधीय धमनी रोग जैसी स्थितियों में लाभकारी।
  • शल्य-क्रिया के बाद सुरक्षा: एंजियोप्लास्टी या स्टेंट लगने के बाद रक्त प्रवाह बनाए रखने के लिए दी जाती हैं।
  • दीर्घकालिक बचाव: जिन लोगों को पहले हृदय या रक्त वाहिकाओं की समस्या हो चुकी हो, उन्हें लगातार सुरक्षा देती हैं।

एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) कैसे काम करते हैं?

एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) दवाइयाँ प्लेटलेट्स के आपस में चिपकने की प्रक्रिया को बाधित करती हैं। प्लेटलेट्स रक्त के छोटे-छोटे कण होते हैं जो चोट लगने पर एक-दूसरे से जुड़कर थक्का बनाते हैं, ताकि रक्तस्राव रुक सके। लेकिन जब यह थक्का धमनियों में बनने लगे, तो यह हृदय और मस्तिष्क तक रक्त पहुंचने में रुकावट पैदा कर सकता है। एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) कुछ विशेष मार्गों को रोककर प्लेटलेट्स की चिपकने की क्षमता घटाती हैं, जिससे खतरनाक थक्के बनने की संभावना कम होती है।

काम करने के तरीके के आधार पर एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) दवाइयों के सामान्य प्रकार

1. साइक्लोऑक्सीजनेज़ अवरोधक

यह दवाइयों का एक वर्ग है जो साइक्लोऑक्सीजनेज़ एंजाइम को रोककर सूजन और दर्द को कम करता है। यह एंजाइम शरीर में ऐसे तत्व बनाते हैं जो सूजन, दर्द और बुखार की प्रक्रिया को बढ़ाते हैं।

उदाहरण: एस्पिरिन (एसीटाइलसैलिसिलिक अम्ल)

2. एडीपी रिसेप्टर अवरोधक (पी टू वाई बारह अवरोधक)

ये एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) दवाइयाँ प्लेटलेट्स पर मौजूद पी टू वाई बारह रिसेप्टर को रोकती हैं। सामान्य रूप से एडीपी नामक तत्व इस रिसेप्टर को सक्रिय करके प्लेटलेट्स को आपस में जोड़ देता है और थक्का बनता है। जब यह प्रक्रिया रोकी जाती है, तो खतरनाक थक्कों का जोखिम कम हो जाता है।

उदाहरण:

3. ग्लाइकोप्रोटीन रिसेप्टर अवरोधक

यह शक्तिशाली एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) दवाइयाँ प्लेटलेट की सतह पर मौजूद रिसेप्टर को रोकती हैं। ये रिसेप्टर फाइब्रिनोजन नामक तत्व को जोड़कर प्लेटलेट्स को आपस में जोड़ते हैं। इस चरण को रोकने से प्लेटलेट्स का चिपकना रुक जाता है और खतरनाक थक्का बनने की संभावना घटती है।

उदाहरण:

एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) दवाइयों की सूची

दवाइयाँ मुख्य विशेषताएँ
एस्पिरिन (एसीटाइलसैलिसिलिक अम्ल) यह प्लेटलेट्स में साइक्लोऑक्सीजनेज़-एक को स्थायी रूप से रोकती है, जिससे थ्रॉम्बॉक्सेन ए-दो घटता है और थक्का बनने से बचाव होता है।
क्लोपिडोग्रेल यह मुंह से ली जाने वाली दवा है जो पी टू वाई बारह रिसेप्टर को स्थायी रूप से रोककर प्लेटलेट्स का चिपकना कम करती है और दिल का दौरा व मस्तिष्काघात के खतरे को घटाती है।
टिकैग्रेलर यह प्लेटलेट पी टू वाई बारह रिसेप्टर को अस्थायी रूप से रोकती है और एडीपी द्वारा होने वाले चिपकाव को घटाकर थक्के का जोखिम कम करती है।
प्रासुग्रेल यह दवा पी टू वाई बारह रिसेप्टर को स्थायी रूप से रोककर थक्का बनने की प्रक्रिया को कमजोर करती है।
टिक्लोपिडीन यह प्लेटलेट पी टू वाई बारह रिसेप्टर को स्थायी रूप से रोककर एडीपी के कारण होने वाले प्लेटलेट चिपकाव को घटाती है और मस्तिष्काघात व थक्के के जोखिम को कम करती है।
एब्सिक्सिमैब यह ग्लाइकोप्रोटीन रिसेप्टर को स्थायी रूप से रोकने वाली शक्तिशाली दवा है, जो प्रतिरक्षा-आधारित औषधि के रूप में दी जाती है और प्लेटलेट्स का जुड़ना रोकती है।
एप्टिफिबाटाइड यह नस के माध्यम से दी जाती है और अस्थायी रूप से प्लेटलेट्स को चिपकने से रोककर दिल के दौरे के जोखिम को कम करती है।
टाइरोफिबैन यह नस के माध्यम से दी जाने वाली दवा है जो अस्थायी प्रभाव के साथ प्लेटलेट्स का चिपकाव घटाती है और थक्के बनने के जोखिम को कम करती है।

एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) के संभावित दुष्प्रभाव

  • नील पड़ने या रक्तस्राव का जोखिम बढ़ सकता है
  • मतली, पेट दर्द, या घाव जैसी पेट से जुड़ी समस्याएँ
  • कभी-कभी एलर्जी जैसी प्रतिक्रिया या यकृत एंजाइम में बदलाव
  • कटने या शल्य-क्रिया के बाद रक्तस्राव लंबे समय तक चलना

कौन लोग एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) से बचें?

  • जिन्हें सक्रिय रक्तस्राव की समस्या हो
  • जिन्हें रक्तस्रावी मस्तिष्काघात का इतिहास हो
  • गंभीर यकृत या गुर्दे की बीमारी वाले रोगी
  • एस्पिरिन या अन्य एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) दवाओं से एलर्जी वाले लोग

एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) लेते समय कौन-सी सावधानियाँ रखें?

  • हमेशा चिकित्सक द्वारा बताई गई मात्रा का पालन करें और खुराक छोड़ने से बचें।
  • किसी भी शल्य-क्रिया या दंत उपचार से पहले चिकित्सक को जरूर बताएं।
  • बिना चिकित्सकीय सलाह के अन्य रक्त पतला करने वाली दवाओं के साथ सेवन न करें।
  • असामान्य रक्तस्राव या नील पड़ने की स्थिति में तुरंत स्वास्थ्य विशेषज्ञ को बताएं।
  • बेहतर परिणाम के लिए नियमित व्यायाम, पौष्टिक भोजन और धूम्रपान छोड़ने की आदत अपनाएँ।

निष्कर्ष:

एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) दवाइयाँ रक्त में थक्का बनने के जोखिम को कम करके मस्तिष्काघात और दिल के दौरे से बचाव में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। इनके उपयोग, फायदे, संभावित दुष्प्रभाव और सावधानियों को समझकर रोगी हृदय संबंधी जोखिमों को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सकते हैं। किसी भी एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) उपचार को शुरू या बंद करने से पहले हमेशा स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है, ताकि उपचार सुरक्षित और प्रभावी रहे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ's):

प्र. एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) दवाइयों का उपयोग किस लिए किया जाता है?
उ. एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) दवाइयाँ रक्त के थक्के बनने से रोकने, दिल के दौरे और मस्तिष्काघात के जोखिम को घटाने तथा कोरोनरी धमनी रोग और परिधीय धमनी रोग जैसी हृदय संबंधी स्थितियों में सुरक्षा देने के लिए उपयोग की जाती हैं।

प्र. एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) और रक्त पतला करने वाली दवाओं में क्या अंतर है?
उ. एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) प्लेटलेट्स को आपस में चिपकने से रोकती हैं और मुख्य रूप से धमनियों में बनने वाले थक्कों को रोकती हैं, जबकि रक्त पतला करने वाली दवाएँ रक्त के जमने की प्रक्रिया को धीमा करती हैं और नसों व धमनियों दोनों में थक्का बनने के जोखिम को कम करती हैं।

प्र. सबसे सामान्य एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) दवाइयाँ कौन-सी हैं?
उ. सामान्यतः उपयोग की जाने वाली एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) दवाइयाँ एस्पिरिन, क्लोपिडोग्रेल, प्रासुग्रेल, टिकैग्रेलर और डिपिरिडामोल हैं। ये दवाइयाँ थक्का बनने का खतरा घटाकर दिल के दौरे और मस्तिष्काघात जैसी घटनाओं की संभावना कम करती हैं।

प्र. एस्पिरिन को एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) क्यों कहा जाता है?
उ. एस्पिरिन साइक्लोऑक्सीजनेज़ एंजाइम को रोकती है, जिससे थ्रॉम्बॉक्सेन ए-दो कम बनता है। यही थ्रॉम्बॉक्सेन प्लेटलेट्स को आपस में जोड़ता है, इसलिए एस्पिरिन प्लेटलेट्स का चिपकना रोककर थक्का बनने से बचाव करती है।

प्र. एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) लेते समय किन खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए?
उ. एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) लेते समय अत्यधिक मदिरा सेवन, चकोतरा, क्रैनबेरी उत्पाद तथा लहसुन या अदरक की बहुत अधिक मात्रा से बचें, क्योंकि ये रक्तस्राव का जोखिम बढ़ा सकते हैं या दवा के प्रभाव पर असर डाल सकते हैं। हमेशा चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

प्र. एंटीप्लेटलेट दवाइयाँ कितने समय तक लेनी पड़ती हैं?
उ. इसका समय रोग की गंभीरता और चिकित्सक की सलाह पर निर्भर करता है। कुछ रोगियों को कुछ महीनों तक, जबकि कई को लंबे समय तक या जीवनभर भी लेना पड़ सकता है।

प्र. क्या एंटीप्लेटलेट दवाइयाँ खाली पेट ली जा सकती हैं?
उ. कुछ दवाइयाँ खाली पेट ली जा सकती हैं, लेकिन एस्पिरिन जैसी दवाएँ पेट में जलन बढ़ा सकती हैं। इसलिए सामान्यतः इन्हें भोजन के बाद या चिकित्सक की सलाह अनुसार लेना बेहतर होता है।

प्र. अगर एंटीप्लेटलेट की एक खुराक छूट जाए तो क्या करें?
उ. जैसे ही याद आए, खुराक ले लें। लेकिन यदि अगली खुराक का समय पास हो, तो छूटी खुराक को छोड़ दें और दोहरी खुराक बिल्कुल न लें।

प्र. एंटीप्लेटलेट दवाइयाँ लेते समय किन संकेतों पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए?
उ. नाक से बार-बार खून आना, मसूड़ों से अत्यधिक रक्तस्राव, पेशाब/मल में खून, काले रंग का मल, ज्यादा चक्कर आना या बिना कारण बड़े नीले निशान दिखें तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।

प्र. क्या एंटीप्लेटलेट दवाइयाँ आयुर्वेदिक औषधियों के साथ ली जा सकती हैं?
उ. कुछ आयुर्वेदिक औषधियाँ रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं। इसलिए कोई भी आयुर्वेदिक दवा, काढ़ा या चूर्ण शुरू करने से पहले चिकित्सक को जरूर बताएं और बिना सलाह मिश्रित सेवन न करें।


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